देहरादून, जेएनएन। डॉ. दिनेश चौहान का कहना है कि किसी भी जंग को जीतने में उस लड़ाई में उतरे हर व्यक्ति का योगदान महत्वपूर्ण होता है। चाहे वह मैदान में मोर्चे पर हो या उसकी रणनीति बनाने में शामिल। कोरोना के खिलाफ जंग में भी हर कर्मचारी-अधिकारी पूरी शिद्दत से जुटा है। हर कोई स्वप्रेरित होकर काम कर रहा है। कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग, सर्विलांस, सेनिटाइजेशन से लेकर संदिग्धों को क्वारंटाइन करने और उनकी मॉनीटरिग व सैंपलिंग तक, पूरा सिस्टम समय की परवाह किए बिना लगातार एक्शन में है। ऐसा तालमेल भी शायद पहले कभी नहीं दिखा। यही कारण है कि स्थिति काफी हद तक नियंत्रण में है। कोरोना संक्रमित जो मरीज अभी तक आए हैं, उनमें तकरीबन 50 फीसदी ठीक भी हो गए हैं।

डॉ. चौहान ने कहा जिला सर्विलांस एवं नोडल ऑफिसर की जिम्मेदारी मिली तो मुझे इस बात का अहसास था कि यह लड़ाई लंबी चलेगी। इसलिए पत्‍नी बच्चों को तभी गांव भेज दिया था। अब पूरा फोकस बस इसी काम पर है। यकीन मानिए, कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई में सैकड़ों कर्मचारी इसी तरह परिवार व खुद की सुध भुलाकर कार्य कर रहे हैं। यूं तो हम काफी पहले ही खुद को तैयार करने लगे थे, पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी में एक प्रशिक्षु आइएफएस के कोराना पॉजीटिव आने के बाद असल लड़ाई शुरू हुई। यह प्रदेश का भी पहला मामला था। कुछ दिन बाद ही यहां दो और प्रशिक्षु आइएफएस कोरोना संक्रमित पाए गए। इसी को देखते हुए सभी प्रशिक्षु, फैकल्टी को क्वारंटाइन करने व एफआरआइ को लॉकडाउन करने जैसे अहम निर्णय लिए गए। साथ ही सर्विलांस भी बढ़ा दी गई।

इसके बाद एक अमेरिकी नागरिक, सेना के एक जेसीओ व सेलाकुई निवासी युवक में कोरोना की पुष्टि हुई। पर असल परीक्षा अभी होनी बाकी थी। मार्च खत्म होते-होते यह लगने लगा था कि हम जल्द इस स्थिति से उबर जाएंगे। दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज की घटना के बाद पूरा परिदृश्य ही बदल गया।

अप्रैल में मरीजों का ग्राफ तेजी से बढ़ने लगा। मार्च अंत तक जहां जिले में छह मरीज थे, अब यह संख्या 25 पहुंच चुकी है। अच्छी बात ये है कि इनमें 12 ठीक भी हो चुके हैं। बहरहाल, जैसे-जैसे समय बीता हमारी चुनौतियां भी बढ़ी हैं। जिनका हमने पूरी तत्परता के साथ मुकाबला भी किया है। जिले में फिलवक्त छह कॉलोनी/क्षेत्र पूरी तरह सील किए गए हैं। जहां तकरीबन 60 हजार की आबादी है। यहां लगातार टीमें सर्विलांस, सेनिटाइजेशन आदि कार्यों में जुटी हैं। ब्लाक स्तर पर भी 90 टीमें बनाई गई हैं। जिनमें डॉक्टर, स्वास्थ्य कर्मी, शिक्षक आदि पूरी शिद्दत से अपना काम कर रहे हैं। वह दिन-रात दून व उत्तराखंड को कोरोना मुक्त बनाने में जुटे हैं। होम क्वारंटाइन किए गए लोगों की भी नियमित निगरानी की जा रही है। आम जन से बस यही अपील है कि वह घर पर रहें और शारीरिक दूरी के साथ अन्य नियमों का पालन करें।

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छह कॉलो‍नी/ क्षेत्र किए गए हैं सील

  • 60 हजार के करीब आबादी हैं इन क्षेत्र में
  • 24घंटे मेडिकल सुविधा पाबंद क्षेत्रों के लिए
  • 21 क्वारंटाइन सेंटर बनाए गए हैं जनपद में
  • 90 टीमें सर्विलांस के काम में जुटीं, होम क्वारंटाइन लोगों की नियमित मॉनीटरिंग
  • 05 हजार से ज्यादा लोग होम व संस्थागत क्वारंटाइन

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Posted By: Sunil Negi

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