देहरादून, जेएनएन। विद्युत वितरण कंपनियों को निजी हाथों में सौंपने को लेकर केंद्र सरकार की ओर से बिल लाने के विरोध में ऊर्जा कर्मियों ने सोमवार को काला दिवस मनाया। उत्तराखंड विद्युत अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले कर्मचारियों ने बांह पर काली पट्टी बांधकर काम किया। इस दौरान शारीरिक दूरी का पालन करते हुए दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन भी किया गया। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने विधेयक पेश करने का निर्णय वापस नहीं लिया तो आदोलन शुरू कर दिया जाएगा। 

नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइस एंड इंजीनियर्स (एनसीसीओईई) के आह्वान पर उत्तराखंड में उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले तीनों ऊर्जा निगमों के अधिकारी एवं कर्मचारीयों ने काली पट्टी बाध कर विरोध दर्ज किया। बिजली कर्मचारियों व इंजीनियरों ने इलेक्ट्रिसिटी अमेडमेंट बिल 2020 के प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की। 

मोर्चा के प्रदेश संयोजक इंसारुल हक ने कहा कि कोरोना महामारी के बीच जब सारा देश एकजुट होकर संक्रमण से संघर्ष कर रहा है तब केंद्र सरकार इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 जारी कर निजीकरण करने में लगी है। इस बिल के उपभोक्ता और किसान विरोधी प्रावधानों व मांग को लेकर मुख्यमंत्री और संसद सदस्यों को ज्ञापन भी भेजा गया। जिसमें उनसे मांग की गई है कि वे इस बिल का विरोध करें और इसे वापस कराने को केंद्र सरकार पर दबाव डालें। 

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विरोध प्रदर्शन में आल इंडिया पावर इंजीनियर्स कारपोरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे, विद्युत ऊर्जा आरक्षित वर्ग एसोसिएशन, उत्तराखंड विद्युत ऊर्जा संविदा कर्मचारी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष विनोद कवि, वाइएस तोमर, जेसी पंत, डीसी गुरूरानी, प्रदीप बंसल, पंकज सैनी, राकेश शर्मा, संदीप शर्मा, एमएन उपरेती, दीपक बेनीवाल, मुकेश कुमार, रविंद्र सैनी, पंकज भट्ट, एमसी गुप्ता, अनिल मिश्रा, गौरव शर्मा, नवीन मिश्रा, सौरभ जोशी, संदीप राठौर, गोविंद प्रसाद व अन्य शामिल हुए।

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