जागरण संवाददाता, देहरादून: पोक्सो कोर्ट ने तीन महिलाओं सहित आठ लोगों को ह्यूमन ट्रैफि किंग का दोषी मानते हुए 12-12 साल की कठोर सजा सुनाई है। साथ ही कोर्ट ने आठों दोषियों पर साठ-साठ हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। ह्यूमन ट्रैफिकिंग का यह मामला वर्ष 2015 में थाना सहसपुर के अंतर्गत प्रकाश में आया था।

विशेष लोक अभियोजक पोक्सो कोर्ट भरत सिंह नेगी ने कोर्ट को बताया कि आठ अक्टूबर 2015 को रात करीब साढ़े दस बजे धर्मावाला स्थित सूर्या पैलेस होटल से पश्चिम बंगाल निवासी एक युवती ने पुलिस को सूचना दी थी कि उसके और उसके एक साथी के साथ होटल में अनैतिक कार्य हो रहा है। मौके पहुंची पुलिस ने वहां से तीन महिलाओं सहित कुल आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से पुलिस ने दो पीड़िताओं को मुक्त कराया। बताया कि मौके पर पुलिस ने महमूद निवासी ढकरानी को पीड़िता के साथ अनैतिक काम करते हुए भी पाया था। साथ ही आपत्तिजनक सामग्री और नकदी भी बरामद की थी। जिसके बाद पीड़िताओं की तहरीर पर आठों आरोपितों के खिलाफ थाना सहसपुर में ह्यूमन ट्रैफिकिंग के साथ ही दुष्कर्म और षड़यंत्र रचने की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। ढाई महीने बाद पुलिस ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। गुरुवार को मामले की सुनवाई करते हुए तमाम गवाहों और सुबूतों के आधार पर स्पेशल पोक्सो कोर्ट की न्यायाधीश रमा पांडे की अदालत ने आठों आरोपितों को दोषी करार दिया और 12-12 साल की कठोर कारावास के साथ ही उन पर 60-60 हजार का जुर्माना की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर उन्हें छह-छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।

इन्हें मिली सजा

शेरखान निवासी सहारनपुर, सुरेंद्र निवासी सहारनपुर, हैदर हुसैन निवासी पुरानी दिल्ली, महमूद निवासी ढकरानी, काजिर हुसैन निवासी धर्मावाला, मंजीत कौर पौंटा साहिब हिमाचल प्रदेश, लता लखनवाला, ममता सहारनपुर।

ह्यूमन ट्रैफिकिंग में पहली बार हुई इतनी बड़ी सजा

विशेष लोक अभियोजक भरत सिंह नेगी ने बताया कि ह्यूमन ट्रैफिकिंग में यह अब तक की सबसे बड़ी सजा है। इसमें मौके पर मिले सुबूत, पीडि़ताओं के 164 के बयान सहित पुलिस की ओर से जुटाए गए साक्ष्य सजा दिलाने में अहम रहे।

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