राज्य ब्यूरो, देहरादून। समग्र शिक्षा अभियान में राज्य को 1800 करोड़ से ज्यादा राशि की वार्षिक कार्ययोजना पर कैंची चल सकती है। कोरोना की दूसरी लहर के चलते अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान और कर वसूली पर असर देखते हुए केंद्र सरकार राज्यों के खुले हाथ से बजट देने के पक्ष में नजर नहीं आ रही है।

दरअसल, लगातार दूसरे वित्तीय वर्ष कोरोना संकट के चलते केंद्र और राज्यों को आर्थिक मोर्चे पर भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। आमदनी घटने का असर केंद्रपोषित योजनाओं पर भी पड़ना तय है। बीते वर्ष इसी वजह से समग्र शिक्षा अभियान के बजट प्रस्ताव में बड़ी कटौती हुई थी। राज्य सरकार ने वर्ष 2020-21 में समग्र शिक्षा अभियान के लिए तकरीबन 1500 करोड़ की वार्षिक कार्ययोजना तैयार की थी। इसके तहत कई नई योजनाओं और नवाचार के प्रस्तावों को भी शामिल किया गया था। बाद में केंद्र ने बामुश्किल 900 करोड़ की कार्ययोजना पर मुहर लगाई।

कमोबेश चालू वित्तीय वर्ष 2021-22 में भी यही अंदेशा जताया जा रहा है। राज्य सरकार की ओर से समग्र शिक्षा अभियान के लिए वार्षिक बजट का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जा चुका है। इस मामले में सुनवाई 24 जून को प्रस्तावित है। कोरोना महामारी के असर को देखते हुए राज्य सरकार बजट प्रस्ताव पर कटौती न होने को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। हालांकि, फिलहाल राहत की बात ये भी है कि समग्र शिक्षा अभियान की वार्षिक कार्ययोजना को मंजूरी से पहले ही केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय पहली किस्त के रूप में 137 करोड़ राज्य के लिए जारी कर चुका है। इससे वेतन मद के साथ ही मुफ्त दी जाने वाली स्कूल ड्रेस और पाठ्यपुस्तकों के मामले में राज्य सरकार को राहत रहेगी। साथ ही सरकार इस दिशा में तेजी से कार्य कर सकेगी। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने उम्मीद जताई कि समग्र शिक्षा अभियान में राज्य को इस वर्ष अपेक्षा के अनुरूप बजट मिल सकेगा।

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Edited By: Sunil Negi