देहरादून, राज्य ब्यूरो। संरक्षित क्षेत्रों के चारों तरफ 10 किमी की परिधि में ईको सेंसिटिव जोन घोषित किए जाने की कड़ी में कैबिनेट ने गंगोत्री नेशनल पार्क और नंधौर सेंचुरी के ईको सेंसिटिव जोन के संशोधित प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। नंधौर में 538.16 वर्ग किमी व गंगोत्री में 619.70 वर्ग किमी क्षेत्र को इस जोन में शामिल करने का प्रस्ताव किया गया है। गंगोत्री के सेंसिटिव जोन में कोई गांव नहीं है, लेकिन वहां से गंगोत्री मंदिर क्षेत्र को इसकी परिधि से बाहर किया गया है। नंधौर के सेंसिटिव जोन की परिधि में आ रहे पांच गांवों में से तीन गांवों डांडा, कठौती मल्ली व बेतलाड़ को बाहर किया गया है। इसके साथ ही इन जोन में 28 गतिविधियों को प्रतिबंधित, विनियमित और अनुमन्य श्रेणी में शामिल किया गया है। केंद्र सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद दोनों संरक्षित क्षेत्रों के ईको सेंसिटिव जोन अस्तित्व में आ जाएंगे।

नंधौर सेंचुरी और गंगोत्री नेशनल पार्क के ईको सेंसिटिव जोन को लेकर क्षेत्रवासियों की आपत्ति को देखते हुए इसकी सीमा के पुन: निर्धारण के लिए अपै्रल में कवायद की गई थी। इसके लिए जनसुनवाई की गई। नंधौर के ईको सेंसिटिव जोन की सीमा न्यूनतम 0.7 किमी व अधिकतम 15 किमी रखी गई है। इस जोन में आ रही दो ग्राम पंचायतों कठौल और बकरियाल की पाटली को ग्रामीणों की सहमति के आधार पर जोन में रखा गया है। अलबत्ता, तीन गांवों को बाहर किया गया है। गंगोत्री नेशनल पार्क के ईको सेंसिटिव जोन की सीमा 10 किमी रखी गई है। इसमें कोई गांव नहीं है। पार्क के उप निदेशक एनबी शर्मा के मुताबिक पहले गंगोत्री मंदिर क्षेत्र इसकी परिधि में शामिल था। अब संशोधित प्रस्ताव में इसे सेंसिटिव जोन से बाहर किया गया है।

नंधौर सेंचुरी की स्थिति

  • 26995 हेक्टेयर है सेंचुरी का कुल क्षेत्रफल
  • 54026.725 हेक्टेयर है इसका ईको सेंसिटिव जोन
  • 53815.80 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्र
  • 15.741 हेक्टेयर वन पंचायत

गंगोत्री नेशनल पार्क

  • 2390.02 वर्ग किमी है कुल क्षेत्रफल
  • 619.70 वर्ग किमी ईको सेंसिटिव जोन
  • 166.20 वर्ग किमी टिहरी प्रभाग का क्षेत्र
  • 453.50 वर्ग किमी नंदादेवी बायोस्फीयर का क्षेत्र

ईको सेंसिटिव जोन में गतिविधियां

  • विनियमित श्रेणी:- वाणिज्यिक खनन, पेड़ कटान, नई आरा मशीन, सकल प्रदूषित व गंभीर रूप से प्रदूषणकारी उद्योग, नए होटल व रिसॉर्ट, भू उपयोग में परिवर्तन, भूजल समेत प्राकृतिक जल संसाधनों का व्यवसायिक उपयोग, जलविद्युत परियोजनाएं, विद्युत लाइन व खंभे।
  • प्रतिबंधित श्रेणी :- जलौनी लकड़ी का वाणिज्यिक उपयोग, होटल व लॉज परिसर की फैंसिंग, वन मार्ग चौड़ीकरण, विदेशी वानस्पतिक प्रजातियां, साहसिक पर्यटन गतिविधियां, ढालों व नदी किनारों की सुरक्षा, वायु, ध्वनि व प्रकाश प्रदूषण, साइन बोर्ड व होर्डिंग्स, रात्रि में वाहनों का मूवमेंट, निर्मित और नई सड़कों का निर्माण।
  • अनुमन्य श्रेणी:- पारंपरिक कृषि व बागवानी, वर्षा जल संग्रहण, जैविक कृषि, नवीनीकरणीय ऊर्जा स्रोत का उपयोग, हरित तकनीकी का उपयोग, कौशल विकास व गांवों में होम स्टे।
  • प्रतिबंधित श्रेणी:- जल निकायों व स्थलीय क्षेत्र में अपशिश्ट व ठोस अपशिष्टों का निर्वह्न व पॉलीथिन बैग का उपयोग।

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