देहरादून, जेएनएन। ईसाई समुदाय ने 'ईस्टर' हर्ष के साथ मनाया। दून के सभी चर्चों में प्रभु यीशु के संदेश दिए गए। सभी ने एक-दूसरे से हाथ और गले मिलकर ईस्टर की बधाई दी। प्रार्थना गीत भी गाए गए। ईसाई धर्म के ग्रंथ अनुसार सूली पर लटाकाए जाने के तीसरे दिन यीशु पुनर्जीवित हो गए थे। इस मृतोत्थान को ईसाई ईस्टर दिवस के रूप में मनाते हैं। यह गुड फ्राइडे के दूसरे दिन आता है। पादरियों ने धर्म से दूर होती पीढ़ी को संदेश दिया कि बगैर प्रभु की प्रार्थना के जीवन सार्थक नहीं हो सकता है। बोझ सबके गुनाह का उठाकर वो सलीब पर जा रहा है...जैसे प्रार्थना गीत गाए गए। 

कॉन्वेंट रोड स्थित सेंट फ्रांसिस कैथालिक चर्च परिसर में फादर रेवरेन फॉस्टिन जॉन पिंटो ने बताया कि प्रभु मानव जाति को गुनाह से बचाने के लिए खुद सूली पर चढ़ गए। यह प्रभु की ही महिमा थी कि वे फिर जीवित हुए और उन्होंने मानव जाति को प्रेम, भाई-चारे का संदेश दिया। उन्होंने युवा पीढ़ी को प्रभु यीशु के बताए रास्ते पर चलने की प्रेरणा दी। कहा कि हम प्रभु की प्रार्थना करेंगे तो प्रभु हमारे जीवन में सुख और शांति लाएंगे। राजपुर रोड स्थित मॉरिसन मेमोरियल चर्च में पास्टर रेवरेन पीजे सिंह ने प्रभु यीशु की महिमा सुनाई। उनके त्याग, बलिदान, समर्पण को सुनकर हर कोई प्रभु यीशु की भक्ति के भाव में डूब गया। 

नगर निगम चौक स्थित सेंट जोन द इवेंगलिस्ट चर्च में फादर रेवरेन नितिन रोबिन सिंह ने विश्व कल्याण व शांति का संदेश दिया। दिलाराम चौक स्थित सेंट थॉमस चर्च में भी फादर मर्लिन और नेशविला रोड स्थित सेंट्रल मेथोडिस्ट चर्च में फादर अमित के सानिध्य में ईस्टर की प्रार्थना कराई गई। 

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Posted By: Raksha Panthari

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