यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 02, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
उत्तरखंड पेयजल निगम के पेंशनर ने किया आंदोलन का एलान, एसोसिएशन ने प्रबंधन को दिया नोटिस
उत्तराखंड पेयजल पेंशनर्स अधिकारी कर्मचारी एसोसिएशन ने पेयजल निगम के प्रबंध निदेशक के नाम आंदोलन का नोटिस भेजा है। एसोसिएशन ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, देहरादून: कई माह से महंगाई समेत अन्य भत्तों का भुगतान न होने और अधिवर्षता आदि का लाभ न दिए जाने पर पेयजल निगम के पेंशनर मुखर हो गए हैं। उन्होंने पेयजल निगम प्रबंधन को आंदोलन की चेतावनी दी है। आगामी 25 अप्रैल को पेंशनर पेयजल निगम मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करेंगे।
उत्तराखंड पेयजल पेंशनर्स अधिकारी कर्मचारी एसोसिएशन ने पेयजल निगम के प्रबंध निदेशक के नाम आंदोलन का नोटिस भेजा है। एसोसिएशन के अध्यक्ष पीएस रावत ने कहा कि एसोसिएशन लंबे समय से विभिन्न मांगों को लेकर संघर्षरत है। कई बार मांगों के निस्तारण की गुहार लगाए जाने के बावजूद पेयजल निगम प्रबंधन की ओर से कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई। इसके चलते कार्मिकों को आंदोलन की राह पकडऩे को मजबूर होना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि एसोसिएशन की प्रमुख मांगों में से एक जनवरी 2016 से 31 दिसंबर 2016 के बीच सेवानिवृत्त कार्मिकों के लंबित ग्रेच्युटी भुगतान को शीघ्र जारी किया जाए। एक जनवरी 2017 के बाद सेवानिवृत्त कार्मिकों पर राशिकरण को बहाल किया जाए। पेंशनरों की आयु 58 वर्ष से 60 वर्ष की अधिवर्षता का लाभ दिया जाए। लंबित अवशेषों का भुगतान, आयुष्मान योजना का लाभ, संघ भवन का निर्माण आदि का मांगों पर कार्रवाई की जाए।
भोजनमाता संगठन ने शिक्षा विभाग के खिलाफ खोला मोर्चा
प्रगतिशील भोजनमाता संगठन ने विद्यालयों में भोजनमाताओं का उत्पीडऩ किए जाने का आरोप लगाते हुए शिक्षा विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने आंदोलन की चेतावनी दी है। शुक्रवार को भोजनमाताएं मयूर विहार स्थित मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय परिसर में एकत्रित हुई। यहां जमकर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन किया और ज्ञापन सौंपा। संगठन की कोषाध्यक्ष नीता देवी ने आरोप लगाया कि विद्यालयों में मिड डे मील बना रही भोजनमाताओं का प्रधानाचार्य और कर्मचारी उत्पीडऩ कर रहे हैं।
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विद्यालय खोलने से लेकर बंद करने तक जिम्मेदारी भोजनमाताओं को सौंप दी गई है। इसके अलावा शौचालय की सफाई, परिसर की साफ सफाई, फुलवारी को विकसित करने समेत अन्य कार्य भी करवाए जा रहे हैं। प्रदेश में करीब 25 हजार भोजनमाताएं इस प्रकार के उत्पीडऩ को झेल रही हैं। कहा उत्पीडऩ बंद न होने पर प्रदेश भर में उग्र आंदोलन किया जाएगा। इस मौैके पर सीमा, राजकुमारी, राखी, अनीता, सरिता, पार्वती, सीता, सुषमा, पूनम, मनप्रीत, रजनी, मीना, रीना, माया, उषा, भगवती, गीता, शीतल, अनीता, सोनिया, कमला, शोभा, ममता, रानी, फूलमती, बेबी, मुनेश, कामनी, कौशल, सरोज आदि मौजूद रहीं।
