देहरादून, राज्य ब्यूरो।  प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से बेहद संवेदनशील उत्तराखंड में इस साल मानसून सीजन से डॉप्लर राडार के जरिये मौसम का सटीक पूर्वानुमान मिलने लगेगा। सुरकंडा देवी और मुक्तेश्वर में जून-जुलाई तक डॉप्लर राडार स्थापित कर दिए जाएंगे। इसके लिए मौसम विभाग कवायद में जुट गया है। इनकी कवरेज रेंज में केदारनाथ व यमुनोत्री धाम समेत राज्य का करीब 85 फीसद हिस्सा आएगा। बदरीनाथ व गंगोत्री धाम सहित शेष 15 फीसद हिस्से की कवरेज के मद्देनजर तीसरे राडार के लिए साइट देखी जा रही है। उत्तराखंड में जून 2013 में आई जलप्रलय के बाद आपदा न्यूनीकरण के मद्देनजर मौसम के सटीक पूर्वानुमान के लिए डॉप्लर राडार की मांग ने जोर पकड़ा। इस बीच मौजूदा केंद्र सरकार ने भी देशभर में 55 डॉप्लर राडार लगाने का निर्णय लिया।

इसमें उत्तराखंड के हिस्से में तीन राडार आए। इसके लिए भूमि व बुनियादी सुविधाएं प्रदेश सरकार को उपलब्ध करानी है। इस कड़ी में कुमाऊं में मुक्तेश्वर और गढ़वाल में सुरकंडा देवी में चयनित की गई भूमि को मौसम विभाग ने उपयुक्त पाया। अब दोनों जगह राडार सेंटर के लिए सुविधाएं जुटाने की कवायद प्रारंभ की गई है। कोशिश यह है कि आगामी जून व जुलाई तक ये दोनों राडार स्थापित कर दिए जाएं। इसके लिए सरकार के साथ ही मौसम विभाग ने कसरत तेज कर दी है। 

राज्य मौसम केंद्र के निदेशक विक्रम सिंह के अनुसार दोनों जगह साइट तैयार होगी और फिर राडार स्थापित कर दिए जाएंगे। जून व जुलाई में राडार लगने पर इसी मानसून सीजन से इनसे पूर्वानुमान भी मिलने लगेंगे। उन्होंने बताया कि मुक्तेश्वर व सुरकंडा देवी के डॉप्लर राडार से राज्य का करीब 85 फीसद क्षेत्र कवरेज रेंज में आएगा। इसमें केदारनाथ व यमुनोत्री धाम भी शामिल हैं। 

उन्होंने बताया कि राज्य के शेष 15 फीसद हिस्से, जिसमें बदरीनाथ व गंगोत्री क्षेत्र भी शामिल हैं, के लिए तीसरा राडार लगाया जाएगा। यह राडार चमोली अथवा पौड़ी जिलों में से किसी एक में लगाया जाएगा। इसके लिए साइट देखी जा रही है। तीनों राडार के काम करने पर पूरा राज्य इनकी कवरेज रेंज में आ जाएगा।

ऐसे काम करेगा डॉप्लर राडार

एक डॉप्लर राडार लगभग 100 किलोमीटर की परिधि में मौसम में पल-पल होने वाले बदलाव का सूक्ष्म अध्ययन कर पहले ही उसके व्यापक स्वरूप और प्रभाव क्षेत्र की जानकारी देगा। डॉप्लर राडार के जरिये रेडियो तरंगे वातावरण में भेजी जाती हैं। यह पानी की बूंदों व धूल कणों से टकराकर वापस लौटती हैं और कंप्यूटर इन्हें अंकित कर चित्र बनाता है। इससे बादलों की सघनता, ऊंचाई व गति मापी जा सकती है। इसी के आधार पर मौसम का पूर्वानुमान लगाया जाता है। इससे बारिश, बादल फटने, तूफान आने, ओलावृष्टि, हिमस्खलन का पहले ही पूर्वानुमान लग लाएगा।

पर्यटन व कृषि में भी लाभकारी 

डॉप्लर राडार से मिलने वाले पूर्वानुमान से न सिर्फ आपदा न्यूनीकरण में मदद मिलेगी, वहीं पर्यटन और कृषि के लिहाज से भी बेहद लाभकारी होगा।

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