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Doon Medical College में रैगिंग का मामला, आरोपी छात्र को हॉस्टल से निकाला

Published: Thu, 22 Jan 2026 09:52 AM (IST)

दून मेडिकल कॉलेज में रैगिंग के आरोप में 2023 बैच के छात्र गौरव पोखरियाल को हॉस्टल से निष्कासित कर दिया ...और पढ़ें

प्राचार्य डा. गीता जैन के निर्देश पर की गई कार्रवाईएंटी रैगिंग कमेटी कर रही प्रकरण की जांच

प्राचार्य डा. गीता जैन के निर्देश पर की गई कार्रवाईएंटी रैगिंग कमेटी कर रही प्रकरण की जांच

HighLights

  1. आरोपी छात्र गौरव पोखरियाल को हॉस्टल से निष्कासित किया गया

  2. जूनियर छात्रों ने नेशनल मेडिकल कमीशन को शिकायत भेजी

  3. एंटी-रैगिंग कमेटी मामले की विस्तृत जांच कर रही है

जागरण संवाददाता, देहरादून।  दून मेडिकल कालेज में बैच 2025 के छात्रों से रैगिंग के आरोपी 2023 बैच के छात्र गौरव पोखरियाल को प्राचार्य डा. गीता जैन के निर्देश पर हॉस्टल से निष्कासित कर दिया गया है। इस मामले में जूनियर छात्रों ने नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) को शिकायत दी थी। छात्रों ने मेल के माध्यम से बताया कि उनके साथ अनुचित व्यवहार और दबाव बनाने की कोशिश की गई।

यह घटना 12 जनवरी की बताई जा रही है। इसी दिन कालेज में रैगिंग का एक अन्य प्रकरण भी सामने आया था। जिसमें छात्र की बेल्ट और चप्पलों से पिटाई की गई थी। इस मामले में 2023 और 2024 बैच के नौ छात्रों के खिलाफ हॉस्टल व कक्षाओं से निष्कासन और जुर्माने की कार्रवाई की गई थी। दोनों घटनाएं एक ही दिन घटित होने के कारण कालेज प्रशासन और छात्रों के बीच सुरक्षा और अनुशासन के मसले पर चर्चा का केंद्र बन गई हैं। प्राचार्य डा. गीता जैन ने बताया कि एंटी रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट अभी तक प्राप्त नहीं हुई है।

आरोपी छात्र को तुरंत हॉस्टल से बाहर किया गया। रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट और संस्तुति मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कॉलेज प्रशासन रैगिंग जैसी घटनाओं को गंभीरता से ले रहा है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए हर संभव कदम उठाएगा। छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हॉस्टल की निगरानी बढ़ाई जाएगी और एंटी रैगिंग कमेटी को सक्रिय रूप से कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।

घटना के दस दिन बाद भी कार्रवाई का इंतजार

देहरादून: रैगिंग की इन घटनाओं को लेकर दून मेडिकल कालेज प्रशासन का रवैया संवेदनहीन रहा। शुरुआती चरण में इन घटनाओं को लेकर न गंभीरता दिखाई और न तेजी। बल्कि मामले को दबाने की कोशिश की गई। हलचल तब हुई जब पहली घटना मीडिया की सुर्खियां बनी। इसके बाद फिर दूसरी घटना सामने आई। एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमीशन) के रिपोर्ट तलब करने पर मामला खुला। ताज्जुब देखिए कि दोनों घटनाएं 12 जनवरी की हैं, पर एक मामले में छात्र दस दिन बाद भी कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।

कालेज प्रशासन का कहना है कि शिकायत एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमीशन) के माध्यम से प्राप्त हुई और इसकी जांच जारी है। प्राचार्य ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे गंभीर मामलों में देरी छात्रों में भय और अविश्वास पैदा करती है और अभिभावकों का भरोसा भी कमजोर होता है।

जानकारी के अनुसार, छात्र सीधे प्रशासन के पास शिकायत करने के बजाय इसे एनएमसी तक भेजने को मजबूर हुए। एंटी रैगिंग कमेटी अब इसकी जांच कर रही है। कुछ अभिभावकों का कहना है कि कालेज प्रशासन को सुरक्षा और निगरानी के मामलों में संवेदनशीलता दिखानी होगी। अन्यथा, छात्र और अभिभावक दोनों ही कालेज प्रशासन पर भरोसा खो देंगे।

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