सिर्फ किताबें ही नहीं, AI और भविष्य की चुनौतियों पर भी विमर्श; दून पुस्तक महोत्सव में जुटीं नामचीन हस्तियां
देहरादून में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा आयोजित 'दून पुस्तक महोत्सव 2026' साहित्य, सिनेमा, इतिहास और आधुनिक तकनीक पर गहन चर्चाओं ...और पढ़ें

दून पुस्तक महोत्सव 2026 में साहित्य से AI तक
HighLights
साहित्य, सिनेमा, इतिहास, AI पर गहन बौद्धिक चर्चाएँ।
जुपिंदर सिंह, इम्तियाज अली, आचार्य प्रशांत जैसे दिग्गज शामिल।
राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा देहरादून में भव्य आयोजन।
डिजिटल डेस्क, देहरादून। शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (NBT), भारत द्वारा आयोजित 'दून पुस्तक महोत्सव 2026' इन दिनों राजधानी देहरादून में बौद्धिक चर्चाओं और सांस्कृतिक विमर्श का केंद्र बना हुआ है। यह साहित्योत्सव न केवल पाठकों और लेखकों को एक मंच पर ला रहा है, बल्कि साहित्य, सिनेमा, इतिहास, नेतृत्व और आधुनिक तकनीक जैसे विविध विषयों पर गहन संवाद का अवसर भी प्रदान कर रहा है। देहरादूनवासियों के लिए यह महोत्सव हर दिन नए विचारों और सार्थक चर्चाओं की सौगात लेकर आ रहा है।
पत्रकारिता और पटकथा लेखन के विविध रंग
महोत्सव के शुरुआती सत्रों में खोजी पत्रकारिता और सिनेमाई लेखन पर विशेष ध्यान दिया गया। खोजी पत्रकार जुपिंदर सिंह ने दर्शकों के साथ साझा किया कि कैसे उन्होंने शहीद भगत सिंह की खोई हुई पिस्तौल को खोजने का रोमांचक सफर तय किया। वहीं, प्रसिद्ध लेखिका और पटकथा लेखक अद्वैता काला ने ‘बिटवीन दि लाइन्स एंड लेन्स’ सत्र में स्वतंत्र भारत में महिलाओं की बदलती छवि पर चर्चा की और फिल्मों व टीवी लेखन के अपने अनुभवों को साझा किया।
अध्यात्म, नेतृत्व और अनसुना इतिहास
दूसरे दिन का आकर्षण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन और नेतृत्व यात्रा पर केंद्रित रहा, जहाँ लेखक बृजेश देसाई ने उनकी प्रारंभिक शिक्षा और मिशन पर विचार रखे। इसी कड़ी में उपन्यासकार कुलप्रीत यादव ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम नायकों और राव तुला राम की वीरता को याद किया। वहीं, आध्यात्मिक शिक्षक आचार्य प्रशांत के सत्र ‘निर्भीक सत्य’ ने जीवन के अर्थ, सुख-दुख के संतुलन और रिश्तों की जटिलताओं पर युवाओं को सोचने के लिए प्रेरित किया।
सिनेमाई यात्रा और क्षेत्रीय साहित्य का गौरव
फिल्म जगत की हस्तियों में निर्देशक इम्तियाज अली ने अपने सत्र के दौरान सिनेमाई पर्दे के पीछे की कहानियाँ सुनाईं। उन्होंने 'रॉकस्टार' फिल्म की कश्मीर में शूटिंग और दर्शकों की बदलती पसंद पर विस्तार से बात की। महोत्सव में उत्तराखंड की मिट्टी की खुशबू भी बिखरी, जहाँ रुचि बहुगुणा उनियाल और बुद्धिनाथ मिश्रा जैसे कवियों ने काव्य पाठ किया। साथ ही, गढ़वाली और कुमाऊंनी अनुवादों के सांस्कृतिक महत्व पर विशेषज्ञों ने भाषाई बारीकियों को बचाने की चुनौतियों पर विमर्श किया।
अंतरिक्ष से रक्षा क्षेत्र तक के अनुभव
साहित्योत्सव में वास्तविक जीवन के नायकों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। भारतीय वायु सेना के फाइटर पायलट और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने छात्रों के साथ अपनी अंतरिक्ष यात्रा के रोमांचक अनुभव साझा किए। रक्षा क्षेत्र पर केंद्रित एक अन्य सत्र में लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ ने आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों और निर्णय लेने की क्षमता (Leadership) जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर युवाओं का मार्गदर्शन किया।
इतिहास और भविष्य का मेल
आने वाले दिनों में यह महोत्सव और भी रोचक होने वाला है। जहाँ एक ओर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विरासत और 1946 के नौसेना विद्रोह (Naval Uprising) जैसे ऐतिहासिक विषयों पर चर्चा होगी, वहीं दूसरी ओर नितिन सेठ ‘स्मार्टर मशीन्स, वाइजर ह्यूमन्स’ सत्र के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मानव के संबंधों के भविष्य पर प्रकाश डालेंगे। विविध दृष्टिकोणों को एक साथ समेटे यह पुस्तक महोत्सव हर पीढ़ी के लिए ज्ञान और प्रेरणा का एक सशक्त स्रोत साबित हो रहा है।
