जागरण संवाददाता, देहरादून। योगगुरु बाबा रामदेव के एलोपैथिक चिकित्सकों पर दिए गए बयान के विरोध में निजी व सरकारी चिकित्सकों ने मंगलवार को काला दिवस मनाया। प्रदेशभर के चिकित्सकों ने काली पट्टी बांधकर काम किया। उन्होंने एक स्वर में बाबा रामदेव की गिरफ्तारी की मांग की। चिकित्सकों ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार जल्द बाबा रामदेव पर कार्रवाई करे। प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संघ ने भी बाबा रामदेव के बयान की निंदा की।

संघ के प्रांतीय महासचिव डॉ. मनोज वर्मा ने स्वास्थ्य कर्मियों से पतंजलि के उत्पादों का बहिष्कार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वह अपने नाते-रिश्तेदारों को भी इस ओर प्रेरित करें। बता दें कि, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की उत्तराखंड शाखा इस मामले में बाबा को पहले ही एक हजार करोड़ रुपये की मानहानि का नोटिस भेज चुकी है। साथ ही प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखकर बाबा के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।

सफेद पट्टी बांधकर दिया शांति का संदेश: कोरोनेशन अस्पताल (जिला चिकित्सालय) में तैनात वरिष्ठ फिजीशियन डा. एनएस बिष्ट ने विरोध का अलग तरीका अपनाया। जहां अन्य चिकित्सकों ने काली पट्टी बांधकर काम किया, वहीं डॉ. बिष्ट ने अपनी बांह पर सफेद पट्टी बांधकर काम किया। उन्होंने कहा कि यह शांति, सद्भावना व समानता का संदेश देने के लिए किया गया है। बाबा रामदेव ने एलोपैथी को लेकर जो बयान दिया और उसके बाद जो स्थिति सामने आई है उससे कहा जा सकता है कि बहस मूल मुद्दे से भटक रही है।

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अस्पताल के चार कमरे खाली कराए 

मसूरी के सिविल अस्पताल के चार कमरों पर बीस साल से अधिक समय से किए गए कब्जे को एसडीएम वरुण चौधरी ने खाली करवा दिया। इन कमरों पर अस्पताल के पुराने कर्मचारियों अवैध रूप से रह रहे थे। अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई की पूरी वीडियोग्राफी करवाकर कमरों में रखे सामान की लिस्ट बनाई गई और चाबी सीएमएस डा. यतेंद्र सिंह को सौंप दी गई। सीएमएस ने कहा कि सिविल अस्पताल को कोविड अस्पताल को कोविड अस्पताल बनाए जाने के बाद ओपीडी संचालित नहीं हो पा रही थी। खाली करवाये गये कमरों में शीघ्र ही ओपीडी संचालित की जाएगी।

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Edited By: Sunil Negi