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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 13, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

एम्स ऋषिकेश में डाक्‍टरों की टीम ने एक महिला की छाती की जटिल सर्जरी की

By Sunil NegiEdited By:
Published: Fri, 13 Aug 2021 05:32 PM (IST)

एम्‍स ऋषिकेश में डाक्‍टरों की टीम ने एक महिला को जीवनदान दिया। एम्‍स में भर्ती महिला को लिम्फैन्जियो लेओ मायोमाटोसिस ...और पढ़ें

एम्स ऋषिकेश में महिला की छाती की जटिल सर्जरी करने वाली डॉक्‍टरों की टीम।
एम्स ऋषिकेश में महिला की छाती की जटिल सर्जरी करने वाली डॉक्‍टरों की टीम।

जागरण संवाददाता, ऋषिकेश। फेफड़ों में मांशपेशियां असामान्य तौर से बढ़ जाने के कारण पिछले तीन माह से आक्सीजन सपोर्ट पर चल रही एक 34 वर्षीया महिला अब बिना किसी परेशानी के तीन मंजिले भवन की सीढ़ियां चढ़ने में सक्षम है। यह सब संभव हुआ है एम्स के अनुभवी शल्य चिकित्सकों की मेहनत से। महिला को लिम्फैन्जियो-लेओ-मायोमाटोसिस नामक बीमारी थी। एम्स, ऋषिकेश के चिकित्सकों ने महिला की छाती की सफलतम जटिल थोरेसिक सर्जरी कर उसे नया जीवन दिया है।

मुजफ्फरनगर (उत्‍तर प्रदेश) निवासी एक 34 वर्षीय महिला करीब 10 वर्षों से सांस लेने की परेशानी से जूझ रही थी। दिक्कतें बढ़ने लगी तो तीन माह पूर्व उसका जीवन आक्सीजन पर निर्भर हो गया। इतना ही नहीं खांसी के दौरान उसे खून आने की शिकायत भी शुरू हो गई। इलाज के लिए उसने मुजफ्फरनगर और मेरठ के बड़े अस्पतालों के चक्कर भी लगाए। बीमारी का पर्याप्त उपचार नहीं होने पर महिला एम्स ऋषिकेश की इमरजेंसी पहुंची। जांचें आगे बढ़ीं तो पता चला कि महिला 'लिम्फैन्जियो-लेओ-मायोमाटोसिस’ नाम की दुर्लभ बीमारी से ग्रसित है और इसकी वजह से उसके फेफड़ों में आक्सीजन पहुंचने में रुकावट हो रही है। स्थिति यह हो चुकी थी महिला को दैनिक कार्यों की निवृत्ति में भी कठिनाई आने लगी थी।

एम्स के ट्रॉमा सर्जन एवं जनरल थोरेसिक सर्जरी प्रोग्राम के इंचार्ज डा. मधुर उनियाल ने बताया कि यह बीमारी बहुत ही दुर्लभ किस्म की है और दस लाख व्यक्तियों में से किसी एक को होती है। इस बीमारी के कारण फेफड़ों की अरेखित मांसपेशियां असमान्य रूप से बढ़ जाती हैं। परिणामस्वरूप सिस्ट बनने के साथ साथ फेफड़ों के स्वस्थ ऊतकों पर भी अनावश्यक दबाव पड़ता है। उन्होंने बताया कि ऐसे में जरूरी था कि फेफड़ों से इन अप्राकृतिक ऊतकों को हटाया जाए। इसके लिए रोगी की पूरी छाती की सर्जरी करने का जोखिम भरा निर्णय लिया गया।

डा. मधुर उनियाल ने बताया कि महिला की इस जटिल थोरेसिक सर्जरी में एम्स दिल्ली के चेस्ट सर्जन प्रो. विप्लव मिश्रा का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। सर्जरी में चार घंटे से अधिक का समय लगा। स्वस्थ होने के बाद अब रोगी को बीते रोज अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी है। डा. विप्लव एवं डा. मधुर के अलावा सर्जरी टीम में डा. अजय कुमार, डा. अवनीश व डा. रूबी भी शामिल थे। उन्होंने बताया कि जितनी जटिल यह सर्जरी थी, उतनी ही जटिल इसमें उपयोग की गई निश्चेतना की प्रक्रिया भी थी। इसका श्रेय उन्होंने ऐनेस्थेसिया विभाग की डा. भावना गुप्ता व टीम को दिया। उन्होंने बताया कि पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के अनुभवी डाक्टरों की वजह से इस बीमारी का पता चल पाया है।

एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने बताया कि ऐसे जटिल आपरेशन में एजुकेशन और स्किल को साझा करने से परिणाम बेहतर आते हैं। उन्होंने बताया कि छाती रोगों से संबंधित थोरेसिक सर्जरी के लिए एम्स ऋषिकेश में उच्च अनुभवी विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि मरीजों को विश्वस्तरीय मेडिकल तकनीक आधारित बेहतर ट्रीटमेंट उपलब्ध कराना एम्स की प्राथमिकता है। रोगी की जान बचाने के लिए जोखिम उठाकर की गई इस सफल सर्जरी के लिए उन्होंने चिकित्सकों की टीम को बधाई दी है।

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