जागरण संवाददाता, देहरादून। मानसून सीजन में गिरासू भवनों का जिन्न भी बाहर निकल आता है। इस दफा भी जिला प्रशासन को गिरासू भवनों (जर्जर हालत में पहुंच चुके भवन) की याद आ गई। मानसून सीजन की व्यवस्था की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी डा. आशीष श्रीवास्तव ने निर्देश दिए कि जो गिरासू भवन चिह्नित किए गए हैं, उन्हें गिराने की कार्रवाई शीघ्र की जाए। दून में अब तक 50 से अधिक गिरासू भवन चिह्नित किए जा चुके हैं। इनमें कई भवन 80-90 साल की अवधि पूरी कर चुके हैं।

सोमवार को आयोजित आनलाइन बैठक में जिलाधिकारी ने सिटी मजिस्ट्रेट कुश्म चौहान को निर्देश दिए कि वह नगर निगम से गिरासू भवनों की सूची मांग लें। इसके अनुरूप नगर निगम के साथ समन्वय बनाकर गिरासू भवनों को गिराने की कार्रवाई जल्द से जल्द पूरी की जाए। ताकि किसी भी संभावित खतरे को टाला जा सके। हालांकि, इससे पहले भी कई दफा गिरासू भवनों को लेकर बैठकें आयोजित की गई हैं। मगर, अभी तक बात आगे नहीं बढ़ सकी।

कई जगह गिरासू भवनों के प्रकरण को कोर्ट में लंबित बताकर कन्नी काट दी जाती है। गंभीर यह कि कोर्ट में मजबूत पैरवी करने और किसी तरह का ठोस हल निकालने के प्रति नगर निगम के अधिकारी दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी नितिका खंडेलवाल, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) जीसी गुणवंत, मुख्य चिकित्साधिकारी डा. मनोज उप्रेती आदि उपस्थित रहे।

अलर्ट पर रहें सभी अधिकारी

मानसून सीजन को देखते हुए जिलाधिकारी डा. आशीष श्रीवास्तव ने सभी अधिकारियों को अलर्ट पर रहने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि कोई भी कार्मिक अपना मोबाइल बंद नहीं रखेगा और जिले से बाहर जाने के लिए सक्षम स्तर पर ठोस कारण के साथ अवकाश स्वीकृत किए जाएंगे। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि आपदा में किसी भी तरह के जानमाल के नुकसान पर मुआवजे की कार्रवाई यथाशीघ्र पूरी की जाए। इसके लिए सभी उपजिलाधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है।

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Edited By: Raksha Panthri