Published: Wed, 09 Jul 2025 02:00 PM (IST)
धामी सरकार की योजनाओं को वित्तीय सहायता देने के लिए अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा। कृषि क्षेत्र के विकास पर ...और पढ़ें
राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। धामी सरकार की नई योजनाओं को धरातल पर आकार देने में अनुपूरक बजट महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहा है। विशेष रूप से कृषि एवं संबंधित क्षेत्र के कायाकल्प की तैयारी है, ताकि प्राइमरी सेक्टर आने वाले वर्षों में प्रदेश की आर्थिकी में बड़ा योगदान निभा सके। अभी इस क्षेत्र का योगदान अपेक्षा से काफी कम है।
विधानसभा का मानसून सत्र गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में आगामी अगस्त माह में होगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हालिया दो दिवसीय दिल्ली प्रवास को अनुपूरक बजट की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। गैरसैंण को प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया है। सरकार विधानसभा का मानसून सत्र अगस्त में करने की तैयारी कर रही है।
सत्र की तिथियां तय करने के लिए मंत्रिमंडल मुख्यमंत्री धामी को अधिकृत कर चुका है। सत्र के दौरान वित्तीय वर्ष 2025-26 का अनुपूरक बजट प्रस्तुत किया जाएगा। अनुपूरक बजट में धामी सरकार राज्य के आर्थिक व सामाजिक विकास की मजबूत नींव तैयार करने वाली महत्वाकांक्षी योजनाओं के लिए धन की व्यवस्था कर सकती है। पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि और औद्यानिकी के विकास के लिए महत्वाकांक्षी योजनाएं सरकार प्रारंभ कर चुकी है।
इन योजनाओं को विस्तार देने के लिए वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करना होगा। साथ में पर्वतीय क्षेत्रों में फसलों को जंगली जानवरों से बचाने की चुनौती है। इन सभी महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों के लिए नई दिल्ली में गत सोमवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ मुख्यमंत्री धामी की बैठक में 3000 करोड़ से अधिक के प्रस्तावों पर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है।
विभागों से मांगे अनुपूरक मांगों के प्रस्ताव
अनुपूरक बजट में कृषि क्षेत्र के साथ ही शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में अवस्थापना विकास कार्यों के लिए धन की व्यवस्था की जाएगी। प्रदेश सरकार ने अनुपूरक बजट को लेकर विभागों के साथ चर्चा प्रारंभ कर दी है। वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने सभी विभागाध्यक्षों से अनुपूरक मांगों के संबंध में प्रस्ताव देने को कहा है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 1,01,175.33 करोड़ के वार्षिक बजट को गत फरवरी माह में बजट सत्र में विधानसभा ने स्वीकृति दी थी। यद्यपि, अभी वार्षिक बजट के अनुसार ही खर्च की रफ्तार तेज नहीं हुई है। ऐसे में सरकार आवश्यक योजनाओं के लिए ही अनुपूरक मांगों पर विचार करेगी। गत वित्तीय वर्ष में अनुपूरक बजट लगभग 5000 करोड़ रहा था। सूत्रों के अनुसार इस बार भी अनुपूरक मांगे इससे अधिक नहीं रहेंगी। इसे कम भी किया जा सकता है।