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धामी कैबिनेट ने 11 पर्वतीय जिलों में स्वैच्छिक-आंशिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति को दी मंजूरी, 275 गांवों की बदलेगी सूरत

Published: Thu, 14 May 2026 05:30 AM (IST)Updated: Thu, 14 May 2026 07:07 AM (IST)

धामी कैबिनेट ने उत्तराखंड के 11 पहाड़ी जिलों में स्वैच्छिक व आंशिक चकबंदी नीति को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य ...और पढ़ें

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राज्य ब्यूरो, देहरादून। विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि की तस्वीर बदलने और पलायन की रोकथाम के दृष्टिगत सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लिया है। राज्य के 11 पहाड़ी जिलों में बिखरी जोत एकीकृत करने और इनमें फिर से फसलें लहलहाने के उद्देश्य से धामी कैबिनेट ने स्वैच्छिक व आंशिक चकबंदी नीति लागू करने को मंजूरी दी है।

इसके तहत पांच साल में पहाड़ के 275 गांवों के कायाकल्प का लक्ष्य रखा गया है। चकबंदी के लिए विवाद रहित गांवों को प्राथमिकता दी जाएगी और न्यूनतम 10 हेक्टेयर अथवा भूमि के अलग-अलग खाताधारक 25 कास्तकारों की लिखित सहमति अनिवार्य होगी।

पहाड़ में बिखरी जोत होने के कारण इसका प्रबंधन किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। उस पर गांवों से हो रहे पलायन के कारण खेती बड़े पैमाने पर बंजर में तब्दील हो रही है। इसे देखते हुए सरकार ने अब चकबंदी के माध्यम से बिखरी जोत को चक के रूप में परिवर्तित कर खेती की तस्वीर संवारने का निश्चय किया है। इस क्रम में कैबिनेट की बुधवार को हुई बैठक में राजस्व विभाग की ओर से रखे गए पहाड़ में स्वैच्छिक व आंशिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति को चर्चा के बाद स्वीकृति दे दी गई।

यह होंगी शर्तें

  • चकबंदी के लिए वही गांव चयनित किए जाएंगे, जो भूमि विवाद से मुक्त हों।
  • भूस्वामी आपसी सहमति से चक बनाने के साथ ही स्वयं चकबंदी योजना बनाएंगे।
  • चकबंदी होने पर घेरबाड़ समेत विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित होंगे कास्तकार।
  • चकबंदी के इच्छुक लोग बंदोबस्त अधिकारी व एसडीएम के समक्ष करेंगे आवेदन।
  • नीति के संचालन, अनुश्रवण व समीक्षा को राज्य स्तर पर उच्चाधिकार प्राप्त समिति और जिला स्तर पर गठित होगी क्रियान्वयन समिति।
  • नीति के अनुभव के आधार पर तीन वर्ष बाद इसमें किए जाएंगे संशोधन व सुधार।


गांवों में अब सामुदायिक होम स्टे संचालित कर सकेंगे लोग

उत्तराखंड के गांवों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए होम स्टे की पहल खूब रंग जमा रही है। इसे देखते हुए कैबिनेट ने अब होम स्टे में कक्षों की संख्या छह से बढ़ाकर आठ करने पर मुहर लगाई है। इसके साथ ही सामुदायिक होम स्टे को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

इसके तहत गांव के आठ-10 लोगों का कोई समूह होम स्टे चलाना चाहता है तो उसे भी सब्सिडी समेत अन्य सुविधाएं मिलेंगी। यही नहीं, पांच साल बाद होम स्टे पंजीकरण के नवीनीकरण की प्रक्रिया सरल की गई है। आनलाइन निर्धारित शुल्क जमा करने पर नवीनीकरण मान लिया जाएगा।

कैबिनेट ने होम स्टे और ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट की अलग-अलग नियमावलियों को एकीकृत कर अब उत्तराखंड पर्यटन यात्रा व्यवसाय पंजीकरण नियमावली बनाने को स्वीकृति दी है। इसमें यह प्रविधान किए गए हैं।

चकबंदी विभाग में समायोजित होंगे 121 कार्मिक

राज्य गठन के समय से ही चकबंदी विभाग में कार्यरत उप्र कैडर के 121 कार्मिकों को अब उत्तराखंड चकबंदी विभाग में समायोजित किया जाएगा। इसके लिए उनसे विकल्प लिए जाएंगे। कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है।

सेवा नियमावली में संशोधन

राजस्व परिषद में समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी पदों के लिए अब कंप्यूटर पर 8000 की-डिप्रेशन प्रतिघंटा की टाइपिंग स्पीड, माइक्रोसाफ्ट आफिस का बेसिक ज्ञान और विंडोज व इंटरनेट का ज्ञान जरूरी कर दिया गया है। कैबिनेट ने इससे संबंधित नियमावली में संशोधन प्रस्ताव को स्वीकृति दी है।