राज्य ब्यूरो, देहरादून: उत्तराखंड में वक्फ बोर्ड की परिसंपत्तियों का मामला इन दिनों सुर्खियों में है। कुछ समय पहले ही ये बात सामने आई थी कि हरिद्वार जिले में वक्फ बोर्ड के नियंत्रण वाली कब्रिस्तान की भूमि बेच दी गई। ऐसे प्रकरणों को देखते हुए सरकार पूरे मामले की जांच करा रही है। साथ ही अब ये व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है कि वक्फ संपत्तियों का पूरा ब्योरा डिजिटाइज कर दिया जाए।

इसी कड़ी में वक्फ संपत्तियों की वर्तमान में जीआइएस मैपिंग चल रही है। इसके पूर्ण होने पर उत्तराखंड वक्फ बोर्ड की एक-एक संपत्ति का ब्योरा एक क्लिक करते ही कंप्यूटर स्क्रीन पर सामने होगा। इससे इन संपत्तियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड में वर्तमान में लगभग ढाई हजार परिसंपत्तियां पंजीकृत हैं, लेकिन गैर पंजीकृत संपत्तियों का आंकड़ा इससे कहीं अधिक है। कुल परिसंपत्तियां चार हजार से अधिक होने का अनुमान है। ऐसे में वक्फ की संपत्तियों को खुर्द-बुर्द करने के मामले भी निरंतर सामने आ रहे हैं। इस पर रोक लगाने के उद्देश्य से ही वक्फ संपत्तियों का डिजिटाइजेशन किया जा रहा है।

इसके साथ ही केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा देश के अन्य राज्यों की भांति उत्तराखंड में भी वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा के मद्देनजर जीआइएस मैपिंग कराई जा रही है।

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राज्य में अब तक 2193 वक्फ संपत्तियों की जीआइएस मैपिंग पूरी हो चुकी है। यद्यपि, मैपिंग का कार्य वर्ष 2020 तक पूर्ण होना था, लेकिन कोरोना संकट समेत अन्य कारणों के चलते यह पूरा नहीं हो पाया है। इसे देखते हुए उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने शेष संपत्तियों की जीआइएस मैपिंग का कार्य इस साल के आखिर तक पूर्ण कराने के मद्देनजर केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय से आग्रह किया है। वक्फ संपत्तियों की जीआइएस मैपिंग में गूगल मैप आदि की मदद ली जा रही है। मैपिंग का कार्य पूरा होने के बाद वक्फ की संपत्तियोंं का डिजिटलाइजेशन हो जाएगा। ऐसे में कोई भी व्यक्ति इनके बारे में जानकारी ले सकता है। इससे वक्फ संपत्तियों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

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Edited By: Sumit Kumar