देहरादून, जेएनएन। जहरीली शराब पीने से हुई छह मौत के जिम्मेदार अजय सोनकर उर्फ घोंचू और उसके गुर्गो की गिरफ्तारी न होने पर रविवार शाम पथरिया पीर की महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा। दर्जनों की संख्या में जुटी महिलाओं ने पुलिस पर नेताओं के दबाव में आरोपित की गिरफ्तारी न करने आरोप मढ़ा और कहा कि अगले 48 घंटे में अगर घोंचू और उसके गुर्गो की गिरफ्तारी नहीं होती है तो वह चक्काजाम करेंगी।

पथरिया पीर में गुरुवार और शुक्रवार को एक के बाद एक छह लोगों की मौत हो गई थी। जबकि दस अभी भी बीमार चल रहे हैं। जांच में सामने आया था कि इन सभी ने मोहल्ले के गौरव सिंह से शराब खरीदी थी। गौरव काफी समय से इलाके में अवैध तरीके से देशी शराब की बिक्री करता था। पुलिस ने गौरव को शनिवार को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन गौरव से पूछताछ में सामने आया कि वह तो केवल मोहरा भर था। असल गुनहगार तो शराब माफिया अजय सोनकर उर्फ घोंचू है। असलियत भी यही है, घोंचू पिछले कई साल से चुक्खूवाला, पथरिया पीर और बिंदाल बस्ती में शराब का अवैध कारोबार करता रहा है। उस पर कई मुकदमे दर्ज हैं और उसके खिलाफ गैंगेस्टर तक की कार्रवाई करने की तैयारी है। इन सब के बीच वह बेखौफ होकर नेताओं के शुभकामना संदेश वाले पोस्टर लगाने के साथ वॉट्सएप ग्रुप बधाई संदेश भेजता रहता है, लेकिन देहरादून की तेजतर्रार पुलिस के पास उसका कोई सुराग नहीं है। यही वजह है कि जहरीली शराब से छह मौतों के जिम्मेदार घोंचू की जब रविवार शाम तक गिरफ्तारी नहीं हुई तो पथरिया पीर बस्ती की महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा और वह एकत्रित होकर पुलिस और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगीं। आरोप लगाया कि पुलिस नेताओं के दबाव में अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी करने से कदम पीछे खींच रही है। मौके पर मौजूद पुलिस कर्मियों ने किसी तरह से उन्हें शांत कराया और आश्वासन दिया कि कोई भी पुलिस के शिकंजे से बच नहीं पाएगा।

कुछ और शराब तस्करों के बताए नाम

पथरिया पीर की महिलाओं ने गौरव के घर के बाहर तीन दिन से खड़े एक स्कूटर को पुलिस को दिखाया। आरोप लगाया कि एक शख्स हर रोज स्कूटर से गौरव के घर आता था। आरोप है कि वह भी गौरव को शराब की सप्लाई करता था। पुलिस ने महिलाओं से कहा कि उनके पास इसके अलावा कई और लोगों के बारे में सूचनाएं हैं, जो इलाके में शराब का अवैध कारोबार करते थे। इन सभी की तलाश में टीमें लगातार संभावित स्थलों पर दबिश दे रही हैं।

पथरिया पीर बस्ती में एक और मौत

पथरिया पीर के गुरुदीन सिंह की रविवार को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। जहरीली शराब पीने से मरा आकाश उसका भतीजा था और इंदर रिश्ते में उसका साला लगता था। परिवार में एक साथ हुई दो मौतों से वह सदमे में था। परिवार वालों ने बताया कि उसे कई दिन से शराब नहीं मिल रही थी। परिजनों ने उसका पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। वहीं, पुलिस का कहना है कि गुरुदीन की मौत प्राकृतिक है।

टीमों की दौड़भाग बेनतीजा

एसएसपी अरुण मोहन जोशी की ओर से शराब तस्करों की गिरफ्तारी को गठित टीम की रविवार देर शाम तक दौड़भाग बेनतीजा रही। बता दें कि एसएसपी ने शहर को छह जोन में बांट कर छह टीमें गठित की हैं, जो अलग-अलग इलाकों में शराब की अवैध तस्करी करने वालों की धरपकड़ कर रही हैं, लेकिन अभी तक पुलिस टीम को कोई खास कामयाबी नहीं मिली है।

शराब के साथ एक धरा

वसंत विहार पुलिस रोहित कुमार निवासी नई बस्ती अरघड़ा, बनियावाला को पांच लीटर कच्ची शराब के साथ गिरफ्तार किया है। एसओ वसंत विहार नत्थीलाल उनियाल ने बताया कि रोहित के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

एसएसपी अरुण मोहन जोशी ने बताया कि पथरिया पीर कांड की गहराई से जांच की जा रही है। घोंचू से लेकर जो भी दोषी है, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। जहां तक राजनैतिक दबाव की बात है तो यह बेबुनियाद और मनगढ़ंत है।

दो प्रवर्तन सिपाहियों पर रहम से उठे सवाल

पथरिया पीर में शराब कांड के सामने आने के बाद विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जिला आबकारी कार्यालय व प्रवर्तन के संबंधित क्षेत्र के दो निरीक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। इसके बाद अगले दिन पांच और कार्मिकों को निलंबित किया गया, जिसमें प्रवर्तन के दो सिपाही भी शामिल थे। मगर, इसके बाद भी प्रवर्तन के दो सिपाहियों को छोड़ दिया गया। इससे अधिकारियों की कार्रवाई पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।

प्रवर्तन इकाई का मुख्य काम ही शराब तस्करी व अवैध शराब के धंधे पर अंकुश लगाना है। पथरिया पीर के प्रकरण के बाद जिला आबकारी कार्यालय के संबंधित क्षेत्र का पूरा स्टाफ ही निलंबित कर दिया गया है। वहीं, प्रवर्तन की जिस इकाई पर प्रमुख रूप से चेकिंग की जिम्मेदारी थी, उसके दो सिपाहियों पर अब भी कार्रवाई नहीं की जा सकी है। क्योंकि यदि क्षेत्र में अवैध रूप से शराब के धंधा लंबे समय से फूल-फल रहा था तो जाहिर है, उसकी जानकारी पूरे स्टाफ की रही होगी। ऐसे में जिला आबकारी अधिकारी कार्यालय की तरह प्रवर्तन के भी पूरे स्टाफ पर कार्रवाई की जानी चाहिए थी। अब इस मामले में अधिकारी कुछ भी बोलने से इन्कार कर रहे हैं। हालांकि, दबी जुबान में तमाम कार्मिक बता रहे हैं कि दो सिपाहियों को विशेष कृपा के चलते छोड़ा गया है।

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शुक्रवार रात निलंबन, आदेश मिले रविवार शाम

आबकारी विभाग ने जिन निरीक्षकों का निलंबन शराब कांड के सामने आने के बाद शुक्रवार रात को कर दिया था, उसके आदेश संबंधित कार्मिकों को रविवार शाम करीब चार बजे मिल पाए। इसके चलते संबंधित कार्मिक शराब तस्करी को लेकर की जा रही दबिश का भी हिस्सा रहे। तकनीकी रूप से यह गलत भी नहीं था। क्योंकि सरकार व्यवस्था में लिखित आदेश को ही अंतिम सत्य माना जाता है। मगर, इससे उच्चाधिकारियों के विभाग पर नियंत्रण की स्थिति भी स्पष्ट होती है।

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