देहरादून। Sanskaarshala: डिजिटल माध्यम ने हमारे जीवन में गहरी पैठ बना ली है। धीमी गति से आरंभ होकर आज यह जनसंचार का ऐसा सशक्त, प्रबल, अत्यावश्यक व अनिवार्य माध्यम बन गया है, जिससे चाहते हुए भी हम दूरी नहीं बना पा रहे हैं। केवल बच्चे ही नहीं बल्कि युवा और बुजुर्गों का भी इससे विशेष जुड़ाव हो गया है।

एक व्यापक चिंता का विषय

नवीन जानकारियां हासिल करने की जिज्ञासा के साथ-साथ मनोरंजन व अपने जीवन के खालीपन, दुख एवं समस्याओं का हल इसमें खोजना और अनेक प्रकार की आभासी दुनिया के आकर्षण, वीडियो गेम्स, अन्य डिजिटल प्लेटफार्म में अधिकाधिक लिप्त रहने ने इसे एक व्यापक चिंता का विषय बना दिया है।

यह ले चुकी है एक व्यवसन का रूप

इसे एक अलादिन का चिराग समझकर हर कोई अपने-अपने तरीकों से जीवन के समाधान खोजने में लगा है। इस पर हमारी इतनी निर्भरता हो चुकी है कि यह एक व्यवसन का रूप ले चुकी है, जिससे जीवन पर नकारात्मक प्रभाव परिलक्षित हो रहे हैं।

करने चाहिए इससे मुक्ति के उपाय

विज्ञान का यह वरदान भस्मासुरी अभिशाप न बने, इससे मुक्ति पाने के कारगर उपाय हर स्तर पर किए जाने चाहिए। विकास के इस दौर में इससे पूरी तरह तो मुक्त तो हुआ नहीं जा सकता, पर आंतरिक अनुशासन का अनुपालन कर बहुत हद तक इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

अभिभावकों की भूमिका अहम

यहां पर अभिभावकों की भूमिका अहम है। वे अपने बच्चे को उचित समय दें, पारिवारिक वातावरण खुशनुमा रखें जिससे बच्चा अपनी समस्याएं, मन के भाव या उथल-पुथल को बेझिझक साझा करें। सुरक्षित वातावरण में वह कभी मीडिया का सहारा नहीं लेगा।

मेहनत की महत्ता सिखाएं

विद्यालयी स्तर पर शिक्षक वास्तविक जीवन कला सिखाएं, उनकी संपूर्ण जिज्ञासा को शांत करें व उन्हें भटकने से बचाएं। मेहनत की महत्ता सिखाएं और अत्याधुनिक डिजिटल माध्यम के दुष्प्रभावों को उजागर करने के लिए लघु कहानियों को सुनाएं।

डिजिटल मीडिया का सही इस्तेमाल हो

विद्यालयी पाठ्यक्रम में डिजिटल संस्कारों को सिखाया जाना भी शामिल किया जा सकता है। जिसका अनुसरण व ज्ञान प्राप्त कर वह विवेकपूर्ण फैसला ले सकें। इस संस्कार को प्राप्त कर वे डिजिटल मीडिया का सही इस्तेमाल कर अपनी ज्ञानशैली में वृद्धि भी कर सकते हैं।

उम्र की सीमा तय की जाए

जिस तरह वाहन चलाने, विवाह करने आदि के लिए एक निश्चित उम्र का प्रविधान है, ठीक उसी तरह इस इंटरनेट मीडिया का प्रयोग करने में भी उम्र की सीमा तय की जाए। डिजिटल प्लेटफार्म में परोसी जाने सामग्री पर भी अंकुश लगे और अतिक्रमण करने वालों को सजा का विधान भी हो।

यह भी पढ़ें: Sanskaarshala: इंटरनेट मीडिया पर कौन कितना प्रभावशाली, यह आप पर निर्भर, सोच समझकर करें इन्फ्लुएंसर का चुनाव

जन अभियान भी आयोजित किए जाएं

इसमें अधिकतर नैतिक मूल्य आधारित विषयों को शामिल किया जाए। युवाओं को जागरूक करने के लिए जन अभियान भी समय-समय पर आयोजित किए जाने चाहिए। विकास की खातिर चारित्रिक उत्थान की अनदेखी ना ही व्यक्तिगत स्तर पर सही है न राष्ट्र स्तर पर ही होगी।

ऐसे में इसके उपयोग व निर्भरता से इसके भविष्य की उज्जवलता की संभावना कम ही होगी। महामारी के दौर में यह स्वीकार करना पड़ा, पर अब इसमें नियंत्रित होना आवश्यक हे क्योंकि 'अति सर्वत्र वर्जिते होता है।

-रजनी पोखरियाल, पीजीटी (हिंदी), श्री गुरु राम राय पब्लिक स्कूल, सहस्त्रधारा रोड

यह भी पढ़ें: Sanskaarshala: इंटरनेट मीडिया इन्फ्लूएंसर्स की परख है जरूरी, कुछ दिखाते अपनी नकली लाइफ स्टाइल

Edited By: Sunil Negi

जागरण फॉलो करें और रहे हर खबर से अपडेट