जागरण संवाददाता, देहरादून। बीमा अवधि के दौरान वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद भी बीमा कंपनी ने क्लेम देने से इंकार कर दिया। इस पर मामला स्थायी लोक अदालत पहुंचा। अदालत ने सुनवाई करने के बाद बीमा कंपनी को दोषी माना और क्लेम की राशि ब्याज समेत देने के आदेश जारी किए।

शिकायतकर्त्ता रेखा ने बताया कि उनके पति उपेंद्र सिंह ने व्यवसायिक वाहन खरीदा था। 20 दिसंबर 2019 को दि ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से उन्होंने वाहन का इंश्योरेंस करवाया। जिसकी वैधता 20 दिसंबर 2019 से 19 दिसंबर 2020 तक थी। 12 नवंबर को बड़कोट से घंडाला जाते समय वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें उपेंद्र सिंह की मृत्यु हो गई। पीडि़त पक्ष की ओर से जब क्लेम के लिए आवेदन किया गया तो इंश्योरेंस कंपनी ने क्लेम को अस्वीकार कर दिया। इंश्योरेंस कंपनी ने तर्क दिया कि पालिसी के लिए पीड़ित की ओर से कोई भी दावा प्रस्तुत नहीं किया गया। दुर्घटना के बाद पीडि़त को दुर्घटना की सूचना तुरंत देनी चाहिए थी।

मंगलवार को स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष राजीव कुमार ने आदेश जारी किया कि शिकायतकत्र्ता के पति के पास दुर्घटना वाले दिन सभी पपत्र वैध थे। इसलिए शिकायतकर्त्ता बीमा धनराशि 15 लाख रुपये पाने की हकदार है। ऐसे में इंश्योरेंस कंपनी को आदेश जारी किए कि शिकायतकर्त्ता को वाहन की बीमा राशि 15 लाख रुपये छह प्रतिशत ब्याज की दर से 30 दिन के अंदर अदा करे।

तंबाकू मुक्त शैक्षिक संस्थान की दी जानकारी

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. मनोज कुमार उप्रेती ने तंबाकू मुक्त शैक्षिक संस्थान की जानकारी दी। साथ ही 18 वर्ष के कम उम्र के बच्चों को मिलने वाले निश्शुल्क उपचार की जानकारी दी गई। मंगलवार को डा. मनोज उप्रेती की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों को विकासखंड व शहरी क्षेत्रों के अध्यापकों को प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान डा. सीएस रावत, अर्चना उनियाल, रेखा उनियाल समेत अन्य मौजूद रहे।

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Edited By: Raksha Panthri