यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 18, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Uttarakhand News: भूकंप के लिहाज से देहरादून की जमीन की मजबूती का होगा परीक्षण, CSIR बेंगलुरु करेगा अध्ययन
देहरादून की ज़मीन की मजबूती का अध्ययन अब सीएसआईआर बेंगलुरु करेगा। हिमालय क्षेत्र के कुछ शहरों को केंद्र सरकार ने ...और पढ़ें

HighLights
- सीएसआईआर बेंगलुरु करेगा देहरादून की भूमि का अध्ययन
- भूकंप के अति संवेदनशील जोन में आता है देहरादून
- 10 किमी के भीतर वाले भूकंप तीन गुना खतरनाक
जागरण संवाददाता, देहरादून। यह पहले से ज्ञात है कि देहरादून हिमालय क्षेत्र का ऐसा शहर है, जो भूकंप के अति संवेदनशील जोन चार और पांच में आता है। ऐसे में यहां की जमीन की मजबूती को लेकर पुख्ता अध्ययन की आवश्यकता है। हालांकि, पूर्व में इस दिशा में वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान समेत भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने सिस्मिक माइक्रोजोनेशन किया है, लेकिन अब सीएसआइआर बेंगलुरु ने दून की मजबूती की दिशा में विस्तृत अध्ययन करने का निर्णय लिया है।
वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान में भूकंप के अध्ययन पर आयोजित कार्यशाला के दौरान यह जानकारी सीएसआइआर चतुर्थ पीआइ, बेंगलुरु (पूर्व नाम मैथमेटिकल माडलिंग एंड कंप्यूटर सिमुलेशन) के मुख्य विज्ञानी डा इम्तियाज परवेज ने दी। उन्होंने कहा कि हिमालय में भूकंप की संवेदनशीलता को देखते हुए इस क्षेत्र के कुछ शहरों का चयन केंद्र सरकार ने अध्ययन के लिए किया है। जिसमें दून को भी शामिल किया गया है।
अध्ययन में देखा जाएगा कि दून की जमीन किस सेंडीमेंट (अवसाद) से बनी है और उसकी मोटाई कितनी है। स्थल विशेष संवेदनशीलता के मद्देनजर शहर के अलग अलग क्षेत्रों में भी यह अध्ययन किया जाएगा। जिसके आधार पर यह तय किया जा सकेगा कि कौन सा क्षेत्र किस तरह के निर्माण के लिए सुरक्षित है।
मुख्य विज्ञानी डा इम्तियाज ने कहा कि इसके अलावा पूरे हिमालय क्षेत्र में भूस्खलन और बाढ़ के लिहाज से भी अध्ययन किया जाएगा। यह परियोजना कुल तीन वर्षों की होगी और इसे जल्द स्वीकृति मिलने की उम्मीद है।
भूगर्भ में 10 किमी तक आने वाले भूकंप तीन गुना खतरनाक
देहरादून: वाडिया संस्थान में आयोजित कार्यशाला के समापन अवसर पर भी विभिन्न विज्ञानियों ने भूकंप पर अपने अध्ययन साझा किए। इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (कोलकाता) के प्रो. सुप्रियो मित्रा ने कहा कि भूकंप से जोखिम को कम करने के लिए संबंधित क्षेत्र की भूगर्भीय स्थिति को जानना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड, हिमाचल और जम्मू कश्मीर में बड़े भूकंप भूगर्भ में महज 10 किमी के आसपास की गहराई में आए हैं। यह अधिक गहराई में आए भूकंप से तीन गुना खतरनाक होते हैं। यह भी पाया गया कि नेपाल में वर्ष 2015 में आया गोरखा अर्थक्वेक अधिक गहराई में आया था, जिस कारण इसकी तीव्रता के मुताबिक नुकसान कम हुआ।
इसी तरह आइआइटी मुंबई के अर्थ साइंसेज डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डा मलय मुकुल ने भूकंप को बेहतर ढंग से जानने के लिए एक हजार किलोमीटर से लेकर नैनोमीटर तक अध्ययन करना होगा। उधर, आइआइटी कानपुर के अर्थ साइंसेज डिपार्टमेंट के प्रोफेसर जावेद मलिक ने कहा कि भविष्य के भूकंप को समझने के लिए ऐतिहासिक भूकंपों को भी जानना आवश्यक है। वर्तमान में ऐसे भूकंपों पर अध्ययन का दायरा बेहद सीमित है। इसके लिए ट्रेंच खोदकर जटिल अध्ययन करना पड़ता है।
