देहरादून में मृतका के नाम पर सोने की धोखाधड़ी, कोर्ट ने दिए दोबारा जांच के आदेश
देहरादून में मृत महिला के नाम पर सोना गिरवी रखने के मामले में न्यायालय ने पुलिस की अंतिम रिपोर्ट खारिज कर दी है।

इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।

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जागरण संवाददाता, देहरादून। महिला की मौत के बाद भी गिरवी रखा सोना उनके नाम पर दर्शाने के मामले में दर्ज मुकदमे की अंतिम रिपोर्ट न्यायालय ने खारिज कर दी है। पुलिस के एफआर लगाने के बाद पीड़ित ने आपत्ति दर्ज की। इसके बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम भावना पांडेय की अदालत ने मामले में दोबारा जांच के निर्देश दिए है।
अधिवक्ता विभोर गोयल ने बताया कि इस मामले में पीड़ित अनिल तिवारी ने फरवरी 2022 को मन्नापुरम फाइनेंस लिमिटेड के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ बसंत विहार थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।
14 अप्रैल 2019 को हो चुकी थी मौत
आरोप था कि उनकी माता मुन्नी देवी की 14 अप्रैल 2019 को मृत्यु हो चुकी थी, लेकिन इसके बाद भी कंपनी के अभिलेखों में अप्रैल 2019 से सितंबर 2019 तक अलग-अलग तिथियों पर उनके द्वारा गिरवी रखा सोना प्राप्त करना दर्शाया गया। इसके अलावा दस्तावेजों में उनकी माता के स्थान पर दूसरी महिला की फोटो और फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया गया।
पीड़ित के अनुसार, उन्होंने अपनी माता के ऋण की करीब 1.69 करोड़ रुपये की अदायगी जुलाई 2019 से मई 2020 के बीच आनलाइन की थी। इसके बावजूद मृतका की व्यक्तिगत उपस्थिति दिखाकर सोना जारी किया जाना दर्शाया गया है। इसके साथ ही आढ़त बाजार स्थित शाखा उनकी माता की मृत्यु के बाद खुली थी, जबकि वहां भी उनके नाम से करीब 23 लाख रुपये का गोल्ड लोन दर्शाया गया।
इस मामले में पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी। पुलिस ने रिपोर्ट में कहा कि पूरा ऋण चुकाने के बाद सोना प्राप्त कर लिया गया और धोखाधड़ी का कोई लाभार्थी नहीं मिला। यह भी बताया गया कि पीड़ित ने फोन पर कंपनी कर्मचारियों से समझौता होने और कार्रवाई न चाहने की बात कही थी।
अदालत ने न्यायालय में समझौता होने से इनकार किया है और कोई लिखित समझौता भी पुलिस ने प्रस्तुत नहीं किया। ऐेसे में मृत्यु के बाद मृतका के नाम पर सोना किसने प्राप्त किया, यह जांच का विषय है। अदालत ने अंतिम रिपोर्ट अस्वीकार कर अग्रिम विवेचना के आदेश दिए है।
