विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

देहरादून में डिजिटल अरेस्ट ठगी का शिकार बुजुर्ग, बैंक अधिकारी की सूझबूझ से बची लाखों की रकम

Published: Sat, 26 Sep 2026 08:54 AM (IST)

एक 72 वर्षीय बुजुर्ग डिजिटल अरेस्ट के साइबर ठगी का शिकार हुए, जिसमें वे पहले ही 30 लाख रुपये गंवा ...और पढ़ें

News Article Hero Image
timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

सोबन सिंह गुसांई, देहरादून। साइबर ठगों के डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसे एक 72 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक को बैंक अधिकारी की सतर्कता ने लाखों रुपये की अतिरिक्त ठगी का शिकार होने से बचा लिया। बुजुर्ग पिछले आठ दिनों से साइबर ठगों के निर्देश पर डिजिटल अरेस्ट थे।

ठगों के कहने पर वह पहले ही करीब 30 लाख रुपये उनके खातों में ट्रांसफर कर चुके थे। यह रकम उन्होंने पेंशन फंड व पेंशन पर लोन लेकर जुटाई थी। बैंक अधिकारी को बातचीत और परिस्थितियों पर शक हुआ, जिसके बाद जांच करने पर डिजिटल अरेस्ट की ठगी का मामला सामने आया।

रकम भेजने का कारण पूछा

गुरुवार को एक वरिष्ठ नागरिक रानीपोखरी स्थित पंजाब नेशनल बैंक पहुंचे और 9.50 लाख रुपये ट्रांसफर करने लगे। उन्होंने आरटीजीएस फार्म भरा और बैंककर्मियों को रकम ट्रांसफर करने को कहा।

रिजर्व बैंक आफ इंडिया के नियमानुसार वरिष्ठ नागरिकों की पांच लाख से अधिक की धनराशि ट्रांसफर करने का अधिकार शाखा प्रबंधक के पास है तो शाखा प्रबंधक पीएनबी रानीपोखरी नरोत्तम मनिहाल ने वरिष्ठ नागरिक को बुलाया और इतनी बड़ी रकम भेजने का कारण पूछा। वरिष्ठ नागरिक ने कहा कि उन्हें रकम अपने रिश्तेदार को भेजनी है।

शाखा प्रबंधक ने जब आरटीजीएस फार्म देखा तो उसमें ट्रेडिंग कंपनी लिखा हुआ था। शक होने पर उन्होंने बुजुर्ग से कहा कि खाता नंबर सही नहीं है और बातों-बातों से बुजुर्ग से मोबाइल ले लिया। शाख प्रबंधक ने मोबाइल देखा तो वह भी हैरान रह गए। देखा कि बुजुर्ग आठ दिन से डिजिटल अरेस्ट थे और 30 लाख रुपये दे चुके थे। शाखा प्रबंधक ने बुजुर्ग को बैठने को कहा और काउंसलिंग के लिए पुलिस को बुला दिया। किसी तरह से पुलिस ने उन्हें भरोसे में लिया और पूछा तो उनकी बातें सुनकर सब हैरान रह गए।

बुजुर्ग ने पुलिस को सुनाई आपबीती

बुजुर्ग ने पुलिस को बताया कि उन्हें आठ दिन पहले एक फोन आया। सामने वाले ने खुद को उज्जैन थाने से बताया। कालर आइडी की फोटो में कोई पुलिसकर्मी दिख रहा था। उसने केस में फंसाने का डर दिखाकर उनसे 30 लाख रुपये ले लिए। जब उनके खाते में पैसे नहीं रहे तो उन्होंने मुथूट फाइनेंस से गोल्ड लोन लिया। गोल्ड लोन से मिली 9.50 लाख रुपये की धनराशि भी वह उन्हें देने जा रहे थे।