जागरण संवाददाता, देहरादून। एक तरफ पूरा देश कोरोना महामारी से त्रस्त है और दूसरी तरफ जालसाजों ने ठगी के कई नए रास्ते तलाश लिए हैं। इसी तरह इन दिनों सरकारी विभागों और प्राइवेट कंपनियों की फर्जी वेबसाइट बनाकर ठगी की जा रही है। इंटरनेट पर ठगों ने विभागों या कंपनियों के नाम से मिलती-जुलती साइट बना ली हैं और इन साइट के जरिये लोगों को ठगी का शिकार बनाया जा रहा है। ताजा मामला मंगलवार को प्रमुख सचिव आनंद बर्धन के बेटे के साथ परिवहन विभाग की फर्जी वेबसाइट पर ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के नाम पर हुई ठगी के रूप में सामने आया। 

दरअसल, इंटरनेट पर कई तरह की फेक वेबसाइट ठगने का काम कर रही हैं। राजधानी देहरादून समेत अन्य जिलों में रोज आम जनता ठगी की शिकार हो रही है। फेक आइडी से ठगी के पिछले दो महीने में दर्जन भर से अधिक केस सामने आ चुके हैं। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ठगी से बचने के लिए कुछ चीजों को सर्च करने में एहतियात बरतना जरूरी है। पिछले दिनों ही आरटीओ की फर्जी वेबसाइट बना ठगों ने लाखों रुपये के टैक्स की चोरी की थी। बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों का टैक्स फर्जी वेबसाइट पर जमा हो रहा था। मामले में पुलिस ने चार युवकों को पकड़ा था। इसके बाद भारतीय रेलवे की भी फर्जी वेबसाइट बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी का मामला सामने आया। अब दोबारा परिवहन विभाग की फर्जी वेबसाइट बनाकर ठगी का पर्दाफाश हुआ है। 

इस तरह चल रहा गोरखधंधा

परिवहन विभाग की जिस फर्जी वेबसाइट पर ठगी का यह गोरखधंधा चल रहा है, वह 'डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट आरटीओ ऑनलाइन डॉट कॉम' है। यह सरकारी वेबसाइट नहीं है। जानकारी के अभाव में अब तक पता न जाने कितने आवेदक इस फर्जीवाड़े के चंगुल में फंस चुके होंगे। सिर्फ ड्राइविंग लाइसेंस बनाने को लेकर ही नहीं, बल्कि रोड टैक्स जमा करने और वाहन का फिटनेस कराने के लिए भी फर्जी वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर फीस ली जा रही है। असली वेबसाइट 'डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट डॉट जीओवी डॉट इन' है, जो परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से संचालित होती है। जो लोग इंटरनेट की ठीक-ठाक जानकारी रखते हैं, उन्हें पता है कि सरकारी वेबसाइट कभी भी 'डॉट कॉम' पर नहीं बल्कि 'डॉट जीओवी डॉट इन' पर होती है। जालसाज इसी अज्ञानता का फायदा उठाकर आमजन से ठगी में कामयाब हो रहे हैं।

बैंक खाते से जुड़ी जानकारी न करें शेयर

साइबर विशेषज्ञ अंकुर चंद्रकांत का कहना है कि इंटरनेट पर कई बार बैैंक की फर्जी वेबसाइट भी सामने आ जाती है। इस वेबसाइट पर खाते की जानकारी डालने पर उसे चुराकर आपके साथ आसानी से जालसाजी हो सकती है। 

कस्टमर केयर का नंबर कंपनी की वेबसाइट से लें

ज्यादातर ऑनलाइन फ्रॉड इंटरनेट पर उपलब्ध फर्जी कस्टमर केयर नंबरों से किए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार हमें किसी भी कंपनी के कस्टमर केयर का नंबर उस कंपनी की वेबसाइट पर जाकर ही लेना चाहिए। ऐसे भी कई मामले सामने आए हैं, जिसमें इंटरनेट से किसी दुकान का नंबर लेकर सामान खरीदने के बाद भुगतान किया गया तो बैंक अकाउंट से गलत तरीके से रुपये कट गए। 

शॉपिंग ऑफर से भी ठगी

ऑनलाइन शॉपिंग ऑफर खोजना भी नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि कई फेक वेबसाइट ऑफर देने के नाम पर पैसे ठग लेती हैं। इसी तरह इंटरनेट पर सर्च करके किसी तरह के कूपन का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए।

स्कैम और फिशिंग साइट से ऐसे बचें

  • फिशिंग साइट http से शुरू होती है और इसमें लॉक का आइकन नहीं होता। जबकि सुरक्षित वेबसाइट https से शुरू होती हैं और लॉक आइकन के साथ होती हैं। इसका मतलब है कि वेबसाइट सुरक्षित हैं।
  • सबसे पहले यूआरएल की जांच करें। इस बात को सुनिश्चित कर लें कि यह असली साइट हैं।
  • जब भी आपसे कोई ई-मेल पर आपकी जानकारी मांगे तो बिलकुल मत दीजिए।
  • ज्यादातर उन वेबसाइट के माध्यम से ठगी की जाती है, जिनका आप पहले से उपयोग करते हैं।
  • आपको कोई प्रलोभन, ऑफर दे तो झांसे में न आएं।
  • अक्सर कुछ साइट हमसे कुछ फॉर्म भरने के लिए कहती हैं। उसमें हमसे जुड़ी जानकारी मांगी जाती हैं, जैसे-नाम, बैंक खाता नंबर, जन्मतिथि, पता, पैन कार्ड नंबर, क्रेडिट कार्ड नंबर आदि। ऐसी साइट पर अपनी निजी व गोपनीय जानकारी उपलब्ध न कराएं।
  • अपरिचित वेबसाइट पर विजिट करने से बचें और पंजीकरण करते समय सावधान रहें।
  • खासकर ऑनलाइन लेन-देन करते समय सुरक्षित नेटवर्क का उपयोग करें और उससे जुड़ी हुई जानकारियां अच्छी तरह पढ़ लें।
  • कोई भी यूआरएल यूज करने के लिए डोमेन नेम का ख्याल जरूर रखें। विशेषज्ञों के अनुसार कन्फ्यूजिंग वेबसाइट का यूआरएल और लुक बेहद खतरनाक होता है। 
  • फ्रॉड यूआरएल आपका पर्सनल व प्राइवेट डेटा चुरा सकता है। इसलिए यूआरएल को ध्यान से समझें और फिर वेबसाइट को क्लिक करें।

डीआइजी एसटीएफ रिधिम अग्रवाल ने बताया कि  आजकल लोग किसी तरह की जानकारी पाने के लिए सबसे पहले इंटरनेट का उपयोग करते हैं। ऐसे में कई बार ऐसी गलती भी हो जाती है, जिससे बैंक अकाउंट से पैसे कटने समेत कई तरह के नुकसान की आशंका भी बनी रहती है। फेक वेबसाइट से होने वाली ठगी से बचने के लिए गूगल से क्या सर्च करें और क्या न करें, इस पर ध्यान देने की जरूरत है। इस तरह के मामले सामने आने पर साइबर पुलिस अपना कार्य करती है।

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