देहरादून, जेएनएन। यह सिस्टम की बेरहमी ही है कि जो जुड़वा नवजात पैदा होते ही मौत के आगोश में समा गए, उनके शव 39 दिन बाद भी मुक्ति की राह देख रहे हैं। नवजात के शव लावारिश हालत में एक निजी अस्पताल की मोर्चरी में रखे गए हैं और अस्पताल प्रशासन के पत्र लिखने के बाद भी अंतिम संस्कार की अनुमति जिलाधिकारी (डीएम) व मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) स्तर से नहीं मिल पा रही है।

शुक्रवार को जब बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ने अस्पताल व मोर्चरी का निरीक्षण किया, तब जाकर यह मामला सामने आया। दरअसल, कुछ समय पूर्व पटेलनगर स्थित श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में नीतू नाम की करीब 19 वर्ष की एक महिला प्रसव के लिए भर्ती हुई थी। 22 अक्टूबर को महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। नवजात के पूरी तरह स्वस्थ न होने पर चिकित्सकों ने उनका उपचार शुरू किया।

हालांकि, उसी दौरान उनकी मौत हो गई। इस बीच महिला भी अस्पताल प्रशासन को बिना बताए गायब हो गई। भर्ती होने के दौरान महिला ने जीएमएस रोड का जो पता और एक फोन नंबर दर्ज कराया था, वहां महिला की उपस्थिति नहीं पाई गई, न ही उसका नंबर व कोई अन्य जानकारी ही मिल पाई।

अस्पताल के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी भूपेंद्र रतूड़ी के अनुसार 24 अक्टूबर को डीएम को पत्र लिखकर अंतिम संस्कार की अनुमति मांगी गई थी। साथ ही मुख्य चिकित्साधिकारी को भी इसी संबंध में पत्र भेजा गया था। इसका जवाब न मिलने पर 15 नवंबर को रिमाइंडर के तौर पर दोबारा जिलाधिकारी को पत्र लिखा गया, मगर इसका भी कोई जवाब नहीं मिला। वहीं, अस्पताल के निरीक्षण के बाद बाल आयोग की अध्यक्ष ने निर्देश दिए कि यदि जिलाधिकारी स्तर से कोई जवाब नहीं मिलता है तो शनिवार को दोनों नवजात के शव का अंतिम संस्कार कर दिया जाए। आयोग के हरकत में आने के बाद पुलिस ने दोनों शव का पंचनामा कराकर अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी है।

मानवाधिकार आयोग ने सीएमओ से मांगी रिपोर्ट

इस मामले में आरटीआइ व मानवाधिकार कार्यकर्ता भूपेंद्र कुमार ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत की थी। शिकायत पर सुनवाई करते हुए आयोग सदस्य अखिलेश चंद्र शर्मा व डॉ. हेमलता ढौंढियाल ने सीएमओ से जवाब तलब किया है। बिहार मिली महिला की लोकेशन जुड़वा बच्चों को जन्म देने वाली महिला ने जो नंबर अस्पताल में दर्ज कराया था, उसकी लोकेशन बिहार में मिली है। पुलिस इस नंबर की जांच-पड़ताल में जुट गई है।

जिलाधिकारी (देहरादून) एसए मुरूगेशन का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन का पत्र कल ही प्राप्त हुआ है। इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। पुलिस को दोनों नवजात के शव के अंतिम संस्कार के निर्देश दिए गए हैं।

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