देहरादून, विजय जोशी। कोरोना महामारी की मार पूरी दुनिया झेल रही है। युवाओं को भी इसने रोजगार से वंचित कर दिया है। घर में कैद कुछ युवा रोजगार का जुगाड़ करने में जुटे हैं। कुछ मध्यम वर्गीय परिवारों के युवाओं ने इस दौरान सब्जी की दुकान ही शुरू कर दी है। वैसे तो लॉकडाउन में बाजारों को बंद रखा गया है, लेकिन आवश्यक वस्तुओं की दुकानें खुली रह सकती हैं। यही कारण है कि फल-सब्जी की दुकानों पर रोक नहीं है। अब जो लोग घरों में बेरोजगार बैठे हैं, उनके लिए भी यही सबसे आसान रास्ता है। सब्जी की दुकान से चार पैसे कमा लेंगे, यही सोचकर कई युवाओं ने घर के बाहर ही सब्जी बेचना शुरू कर दिया है। वैसे यह कोई स्थायी रोजगार तो नहीं माना जा सकता है, लेकिन जब तक लॉकडाउन है और स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, तब तक तो यह आय का तरीका भी बुरा नहीं है।

लॉकडाउन का सदुपयोग

लॉकडाउन में परिवार के सदस्य घर में एकसाथ हैं। परिवार के साथ मनोरंजन और बातचीत का भी भरपूर समय मिल रहा है। लेकिन, युवाओं को इस समय का सदुपयोग करने की आवश्यकता है। इस दौरान अपना ज्ञान बढ़ाने के साथ ही अपने छोटे भाई-बहनों या अन्य सदस्यों को पढ़ा भी सकते हैं। ऐसे कई लोग हैं जो आज भी संयुक्त परिवार में रहते हैं।

अब कोई चाचा-भतीजे तो कोई माम-भांजे भी साथ में ही लॉकडाउन हैं। युवाओं को चाहिए कि वे परिवार के छोटे सदस्यों को शिक्षित कर सकते हैं। यह इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि उनके स्कूल-कॉलेज भी बंद हैं और बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी परिवार के लोगों के ऊपर ही अधिक है। ऐसे में खेलकूद और टीवी के साथ कुछ समय छोटों को पढ़ाने में बिताएं, जिससे लॉकडाउन का दोहरा लाभ मिल सके। तभी कोरोना को हराने में यह लॉकडाउन पूरी तरह कारगर भी माना जा सकेगा।

बहुर गए दिन

लॉकडाउन के चलते आउटडोर गेम्स बंद हो गए हैं, लेकिन इससे इनडोर गेम्स के दिन बहुर गए हैं। जहां लूडो, कैरम, सांप-सीढ़ी जैसे खेल बिसराए जा रहे थे, अचानक अब घर-घर में इन खेलों ने कब्जा जमा लिया है। अब तो यह भी जरूरी नहीं कि आपके घर में लूडो या सांप-सीढ़ी उपलब्ध हो। मोबाइल जो है जनाब, हर समस्या का समाधान। बस गूगल प्ले स्टोर पर जाइए और मन पसंद गेम डाउनलोड कर लीजिए। प्ले स्टोर पर बीते एक माह के भीतर 20 लाख से अधिक लोग लूडो का एप डाउनलोड कर चुके हैं। इसके अलावा अन्य गेम्स भी तेजी से डाउनलोड हो रहे हैं। घर में मनोरंजन के लिए परिवार के साथ लूडो का भी तो अलग ही मजा है। हां फोन की बैटरी जरूर जवाब दे सकती है, लेकिन इन दिनों तो घर के लगभग सभी सदस्य एक साथ हैं तो फोन की भी कोई टेंशन नहीं।

घर में सहयोग

आमतौर पर युवाओं में घर के कार्यों के प्रति रुचि नहीं रहती, लेकिन लॉकडाउन में ये कार्य भी टाइमपास का अच्छा विकल्प बन रहे हैं। इन दिनों घर में युवा भी कामकाज में हाथ बंटा रहे हैं। वाशिंग मशीन में कपड़े धोना हो या आंगन में झाड़ू लगाना। युवाओं के लिए भी ये आजकल रुचि के कार्य बन गए हैं। यही नहीं, किचन में भी उनकी दिलचस्पी बढ़ गई है।

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खाली टाइम है तो नई-नई डिश ट्राई करने में भी क्या हर्ज। इसमें लड़कियां ही नहीं, लड़के भी हाथ आजमा रहे हैं। सब्जी-दाल बनाने के साथ ही सब्जी काटने का काम भी आजकल युवाओं को सौंप दिया जा रहा है। चलो लॉकडाउन के बहाने युवाओं को घरेलू कार्यों का भी अनुभव तो हुआ। घर के छोटे-मोटे काम के बहाने कुछ एक्सरसाइज भी हो जाती है और परिवार की मदद भी। साथ ही व्यस्त रहने का भी यह बेहतर तरीका है।

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Posted By: Raksha Panthari

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