देहरादून, जेएनएन। भाजपा नेता और पूर्व पार्षद जीवन सिंह का कोरोना संक्रमण के चलते निधन हो गया। वे मसूरी रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती थे। उनके निधन के बाद स्वजनों को शव न सौंपने के चलते अस्पताल में हंगामा भी हुआ। भाजपा विधायक और पार्षदों के पहुंचने पर अस्पताल ने शव सौंपा। हालांकि, अस्पताल की ओर से सभी आरोपों को नकार दिया गया है।

करनपुर निवासी सरदार जीवन सिंह पार्षद रह चुके हैं और वर्तमान में उनकी पत्नी रानी कौर पार्षद हैं। कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद जीवन बीते 20 दिन से अस्पताल में भर्ती थे। रविवार को अचानक उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई और उनका निधन हो गया। जीवन सिंह 56 वर्ष थे। वे अपने पीछे बुजुर्ग माता, पत्नी, तीन बेटे और एक बेटी को छोड़ गए। करनपुर में डीएवी पीजी कॉलेज के सामने उनकी चाय-समोसे की दुकान है। 

जीवन को करनपुर क्षेत्र में मामा के नाम से पुकारा जाता था। उनके आकस्मिक निधन से भाजपा कार्यकर्ताओं में भी शोक की लहर है। मसूरी विधायक गणेश जोशी, खजानदास, पार्षद भूपेंद्र कठैत समेत तमाम अन्य भाजपाइयों ने उनके निधन पर शोक जताया। डीएल रोड स्थित श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। 

अस्पताल प्रबंधन पर लगाए आरोप 

पार्षद भूपेंद्र कठैत ने बताया कि मैक्स अस्पताल प्रबंधन शव देने में आनाकानी कर रहा था। उन्होंने 12 लाख रुपये का बिल बना रखा था, जिसमें से करीब आठ लाख रुपये जमा किए जा चुके थे। लेकिन, अस्पताल की ओर से चार लाख रुपये और जमा कराने के बाद ही शव देने की बात कही गई। मसूरी विधायक गणेश जोशी और पार्षदों ने अस्पताल से इलाज के खर्च का ब्यौरा मांगा तो उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। अंत में अस्पताल ने शव परिवार को सौंप दिया। इधर, अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल प्रसाद ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि कोई बकाया नहीं था और न ही अस्पताल ने उनका शव देने में आनाकानी की।

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