देहरादून, राज्य ब्यूरो। बहुद्देश्यीय किसान सेवा सहकारी समिति विकासनगर में 1.97 करोड़ नहीं, बल्कि 3.77 करोड़ रुपये का गबन हुआ। पिछले पांच वर्षों में यह राशि निकाली तो गई, लेकिन संबंधित लोगों को इसका भुगतान नहीं किया गया। प्रकरण की फाइनल हो चुकी जांच रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है, जो एक-दो दिन के भीतर निबंधक (सहकारी समितियां) को सौंपी जाएगी। रिपोर्ट में समिति में संचालित मिनी बैंक प्रभारी को मुख्य रूप से दोषी ठहराया गया है, जबकि समिति के सचिव व अकाउंटेंट के अलावा जिला सहकारी बैंक के शाखा प्रबंधक और विकासनगर के तत्कालीन एडीओ (सहकारिता) को दायित्व निर्वहन में लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। उधर, जिला सहायक निबंधक ने निबंधक (सहकारी समितियां) को पत्र भेजकर इस मामले की एसआइटी जांच की सिफारिश की है। साथ ही प्रकरण में आरोपितों की संपत्ति की जांच कराने के लिए देहरादून के जिलाधिकारी को पत्र भेजा है।

विकासनगर की बहुद्देश्यीय किसान सेवा सहकारी समिति में गड़बड़झाले की शिकायतें मिलने के बाद सहकारिता विभाग ने समिति का ऑडिट कराया। इसी साल जून में मिली ऑडिट रिपोर्ट में बात सामने आई कि समिति में 1.97 करोड़ का घपला हुआ है। समिति में संचालित मिनी बैंक के जरिये निकाली गई यह राशि न तो कैशबुक व लेजर में अंकित थी और न जिला सहकारी बैंक की शाखा में इसे जमा कराया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए समिति की सुपरवाइजर व सचिव, विकासनगर के एडीओ सहकारिता को निलंबित कर दिया गया था। बाद में समिति में संचालित मिनी बैंक प्रभारी, अकाउंटेंट और जिला सहकारी बैंक के शाखा प्रबंधक को निलंबित किया गया।

इसके साथ ही निबंधक (सहकारी समितियां) ने प्रकरण की जांच के लिए उप निबंधक (गढ़वाल) मान सिंह सैनी की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कमेटी गठित की। बाद में इस कमेटी में पांच और सदस्य शामिल किए गए। कमेटी ने इस समिति की गहनता से जांच पड़ताल के बाद रिपोर्ट तैयार कर ली है। जांच कमेटी के सदस्य एवं देहरादून के जिला सहायक निबंधक सीएस गहतौड़ी ने इसकी पुष्टि की और बताया कि एक-दो दिन में रिपोर्ट निबंधक (सहकारी समितियां) को सौंप दी जाएगी।

उन्होंने बताया कि समिति में 3.77 करोड़ का गबन सामने आया है। यह राशि समिति में संचालित मिनी बैंक के माध्यम से निकाली गई, लेकिन संबंधित लोगों को इसे नहीं दिया गया। उन्होंने जानकारी दी कि इस मामले में सहकारी समिति को पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने को दो बार लिखा जा चुका है। प्राथमिकी समिति को ही दर्ज करानी है, क्योंकि पैसा उसी का है। अब फिर से रिमाइंडर भेजा जा रहा है।

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रिपोर्ट मिलने पर होगी आगे की कार्रवाई

अपर सचिव एवं निबंधक (सहकारी समितियां) बीएम मिश्र ने बताया कि इस प्रकरण की जांच रिपोर्ट अभी उपलब्ध नहीं हुई है। रिपोर्ट मिलते ही इसमें आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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