देहरादून, जेएनएन। बीमा प्रपत्र में हुई त्रुटि के लिए उपभोक्ता जिम्मेदार नहीं है। बीमा कंपनी स्वयं की गई गलती का लाभ लेकर क्लेम निरस्त नहीं कर सकती है। जिला उपभोक्ता फोरम ने ऐसे एक मामले में उपभोक्ता को बड़ी राहत दी है। बीमा कंपनी को 30 दिन के भीतर क्लेम अदायगी का आदेश दिया है। 

जीएमएस रोड निवासी लाल सिंह ने ओरियंटल इंश्योरेंस के वरिष्ठ मंडलीय प्रबंधक को पक्षकार बना जिला उपभोक्ता फोरम में वाद दायर किया। वादी के अनुसार उन्होंने उक्त बीमा कंपनी से अपनी गाय का बीमा कराया था। गाय की बीमा अवधि में मौत हो गई। इसकी सूचना उन्होंने चिकित्साधिकारी सदर को दी। गाय की परीक्षण किया गया और इसकी सूचना बीमा कंपनी को भी दी गई। बीमा कंपनी की अनुमति के बाद डॉक्टर ने गाय का पोस्टमार्टम किया। पर कंपनी ने बीमा की अवधि गलत बताकर क्लेम निरस्त कर दिया। 

बीमा कंपनी ने फोरम में कहा कि जिस दिन प्रीमियम की राशि अदा की जाती है, उस दिन से ही बीमा प्रभावी हो जाता है। बीमा प्रपत्र में त्रुटिवश तिथि गलत अंकित हो गई है। जब गाय मरी वह बीमा से आच्छादित नहीं थी। फोरम के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह दुग्ताल व सदस्य विमल प्रकाश नैथानी ने साक्ष्य के आधार पर माना कि विपक्षी यह कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकता कि प्रपत्र में तिथि गलत अंकित हुई है। यदि किसी स्तर पर चूक हो भी गई है तो तत्समय इसकी सूचना उपभोक्ता को दी जानी चाहिए थी। 

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इस त्रुटि को ठीक करते हुए नया बीमा प्रमाण पत्र जारी किया जाना था। ऐसा ना कर विपक्षी स्वयं की गई गलती का लाभ नहीं ले सकता है। फोरम ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी 40 हजार रुपये का क्लेम उपभोक्ता को अदा करे। इसके अलावा पांच हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति भी देनी होगी।

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Posted By: Bhanu

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