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देहरादून, [राज्य ब्यूरो]: पीडीएफ को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी को एक बार फिर झटका लगा है। प्रदेश सरकार के संकटमोचक प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट (पीडीएफ) के विधायकों को लेकर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने साफ कर दिया है कि वे कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ें या अन्य तरीके से, कांग्रेस उनके साथ मिलकर चलेगी।
कमोबेश इसी तर्ज पर प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी ने भी मुख्यमंत्री के सुर से सुर मिलाते हुए कहा कि पीडीएफ कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहता है या किसी अन्य तरीके से, यह फैसला उन्हें ही करना है। हाईकमान ने पीडीएफ से बात करने के लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत और प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को अधिकृत किया है।

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पीडीएफ को लेकर प्रदेश कांग्रेस के भीतर रार गाहे-बगाहे सतह पर आ जाती है। बीते रोज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में पीडीएफ के मुद्दे की गूंज रही।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने राज्य की सभी 70 सीटों पर पार्टी प्रत्याशी घोषित करने पर जोर दिया था। वहीं मुख्यमंत्री पीडीएफ के मुद्दे पर किसी भी तरह की तकरार के पक्ष में नहीं हैं।
राजीव भवन में पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि कांग्रेस पीडीएफ के साथ है। अगर पीडीएफ से जुड़े विधायक कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लडऩा चाहेंगे तो उन्हें ऐसा अवसर मिलेगा। अगर वह किसी अन्य तरीके से चुनाव लड़ना चाहते हैं तो भी पार्टी इसके लिए भी तैयार है।

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उन्होंने कहा कि पांच साल सरकार चलाने में सहयोग करने वालों से नाता नहीं तोड़ा जाएगा। उन्हें चुटकी लेते हुए कहा कि पीडीएफ से सात फेरे लिए हैं। यह बंधन टूटने वाला नहीं है।
वहीं प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी ने भी कहा कि पीडीएफ हर चुनौती में कांग्रेस के साथ रहा है। वह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते हैं या अन्य तरीके से, उन्हें ही तय करना है। पार्टी हाईकमान ने पीडीएफ के मामले में गहराई से विचार करने और पीडीएफ से वार्ता करने को मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को अधिकृत किया है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश चुनाव समिति में प्रस्ताव पारित कर चुनाव प्रत्याशियों के चयन का अधिकार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी को सौंपा गया है। बैठक में पारित अन्य प्रस्ताव में पार्टी के पैनल को अंतिम रूप देने को मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष को अधिकृत किया गया है। उन्होंने बताया कि पार्टी टिकट के लिए आए 1100 आवेदन छंटनी के बाद 500 तक रह गए हैं।

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स्वच्छ छवि और कार्यकर्ताओं का समर्थन जरूरी
प्रदेश प्रभारी ने कहा कि प्रत्याशियों का विधानसभा क्षेत्रवार एक-दो का पैनल तैयार कर स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रत्याशी चयन में पारदर्शिता रहेगी। प्रत्याशी बनने के लिए स्वच्छ छवि व इल्जाम नहीं होने चाहिए। आवेदक की पार्टी की विचारधारा में आस्था जरूरी है। साथ ही टिकट के दावेदार को पार्टी कार्यकर्ताओं का समर्थन मिला होना चाहिए।

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Posted By: Bhanu

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