देहरादून, रविंद्र बड़थ्वाल। प्रदेश में बड़ी टूट झेल चुकी कांग्रेस 2022 के विधानसभा चुनाव की जंग सबको साथ लेकर लड़ेगी। नई प्रदेश कार्यकारिणी के स्वरूप में पार्टी ने सबको खुश करने की रणनीति को खास तवज्जो दी है। इसी वजह से वर्ष 2009 से चले आ रहे जंबो कार्यकारिणी के फार्मूले को आगे बढ़ाया गया है। पार्टी नेतृत्व ने प्रदेश इकाई का आकार छोटा रखने को प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह से खूब मशक्कत कराई, लेकिन आखिर में आजमाए हुए पुराने नुस्खे पर  भरोसा किया। विधायकों, पूर्व विधायकों और पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशियों को संगठन में तरजीह देकर भावी चुनावी रणनीति के संकेत दे दिए हैं।

उत्तराखंड में पिछले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बड़ी टूट झेल चुकी कांग्रेस अगले मिशन 2022 के लिए पार्टी क्षत्रपों को एकजुट और मुस्तैद देखना चाहती है। नई प्रदेश कार्यकारिणी को जिस ढंग से आकार दिया गया, उसमें यह साफ दिखाई दे रहा है। प्रदेश में खड़े किए गए नए संगठन में पार्टी में सक्रिय पुराने चेहरों पर दोबारा दांव खेलना मुनासिब समझा है।

पिछली प्रदेश कार्यकारिणी की सदस्य संख्या 395 थी। इस बार भी यह संख्या 242 तक है। प्रदेश कांग्रेस की मुख्य कमेटी में 22 उपाध्यक्षों व 31 महामंत्रियों में ज्यादातर पूर्व विधायक और पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी शामिल किए गए हैं। अलबत्ता, सचिवों की 98 की सूची में संगठन से जुड़े लोगों को भी जगह मिली है। इसी तरह 90 सदस्यीय लंबी-चौड़ी सूची विशेष आमंत्रित सदस्यों की सूची है।

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इसमें पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश, ब्रहमस्वरूप ब्रहमचारी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय, राज्यसभा सदस्य प्रदीप टम्टा, पूर्व सांसद केसी सिंह बाबा, मनीष खंडूड़ी, सतपाल ब्रह्मचारी समेत तमाम ऐसे नाम हैं जो कार्यक्रमों से लेकर गाहे-बगाहे हर मौके पर पार्टी में सक्रिय दिखाई देते हैं। इस कारण हरीश रावत से जुड़ा बड़ा खेमा नई कमेटी में मौजूद हैं तो दूसरे क्षत्रपों को भी संतोष का मौका दिया गया है।

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Posted By: Sunil Negi

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