देहरादून, [जेएनएन]: पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के विरोध में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के भारत बंद का उत्तराखंड में मिलाजुला असर रहा। गढ़वाल और कुमाऊं दोनों मंडलों में तस्वीर एक जैसी ही रही। हालांकि प्रदेश में स्कूल, कॉलेज और सरकारी कार्यालय खुले रहे। विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में बंद की कमान संभाली। जुलूस निकालकर प्रदर्शन किए और मोदी सरकार के पुतले फूंके।

राजधानी देहरादून में सुबह प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में एकत्र हुए कार्यकर्ता प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के नेतृत्व में सड़कों पर उतरे। इस दौरान पलटन बाजार और राजपुर रोड पर बाजार बंद रहे, लेकिन शहर के अन्य भागों में रोज की तरह दुकानें खुलीं। इस दौरान पल्टन बाजार में कांग्रस कार्यकर्ता और व्यापारियों में हल्की नोकझोंक भी हुई। इसके अलावा उत्तरकाशी, टिहरी और चमोली में बंद का असर आंशिक रहा, जबकि पौड़ी के कुछ कस्बों में बंद का अच्छा असर देखने को मिला। रुद्रप्रयाग में भी व्यापारियों ने दोपहर तक अपने प्रतिष्ठान नहीं खोले। रुड़की के कुछ क्षेत्रों में बंद सफल रहा, लेकिन हरिद्वार में सपा के शामिल होने के बावजूद यह ज्यादा प्रभावी नहीं रहा।

कुमाऊं के हल्द्वानी में ज्यादातर दुकानें बंद रहीं, लेकिन नैनीताल में यह बेअसर रहा। सुबह से ही दुकानें खुली रहीं। हालांकि पिथौरागढ़ में बंद कुछ हद तक कामयाब रहा। चम्पावत में बंद कराने उतरे कार्यकर्ताओं को ज्यादा सफलता नहीं मिली, लेकिन अल्मोड़ा में व्यापक असर रहा।

दूसरी ओर भाजपा ने कांग्रेस के बंद आहूत करने की निंदा की। उत्तराखंड के वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि बेहतर होता कांग्रेसी बंद के लिए सड़कों पर उतरने की बजाए हिमालय पुत्र गोविंद वल्लभ पंत की जयंती पर उन्हें याद करते।

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