जागरण संवाददाता, देहरादूनकान्फेडरेशन आफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने अर्द्धसैनिकों को सेना के समान सुविधाएं देने की मांग की है। साथ ही सेवानिवृत्त अर्द्धसैनिकों और शहीद परिवारों के पुर्नवास व कल्याण के लिए राज्य में अर्द्धसैनिक कल्याण बोर्ड की स्थापना और सम्मान राशि को बढ़ाकर एक करोड़ रुपये करने की भी मांग की। इस संबंध में एसोसिएशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल ले. जनरल गुरुमीत सिंह से मुलाकात की। संगठन ने अपनी मांगों को लेकर पुलवामा शहीदी दिवस यानी 14 फरवरी को दिल्ली में राजघाट पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन का एलान किया है। 

राज्यपाल से मुलाकात के बाद प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए एसोसिएशन के अध्यक्ष सीआरपीएफ के रिटायर्ड एडीजी एचआर सिंह ने कहा कि अर्द्धसैनिक बल न केवल सरहद पर ड्यूटी कर रहे हैं, बल्कि आंतरिक सुरक्षा की कमान भी संभाले हुए हैं। नक्सल प्रभावित इलाकों में दिन रात ड्यूटी कर रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी उनके साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जा रहा है। सेना की तरह पूरी ड्यूटी करने के बाद भी सुविधाओं के नाम पर न उनके साथ पेंशन, वेतन, चिकित्सा, कैंटीन आदि को लेकर भेदभाव किया जाता है।

महासचिव रणवीर सिंह ने कहा कि देश में सेना झंडा दिवस की तर्ज पर अर्द्धसैनिक झंडा दिवस भी मनाया जाए। गृहमंत्रालय के आदेश में अर्द्धसैनिक बलों को सिविलियन फोर्स करार देने की उन्होंने कड़ी भर्त्सना की। उन्होंने कहा कि अर्द्धसैनिक बलों की पुरानी पेंशन बहाली, वन रैंक-वन पेंशन, कैडर आफिसर्स को महानिदेशक बनाने व अन्य मांगों को लेकर पुलवामा शहीदी दिवस पर बापू की समाधि पर शांति पूर्ण धरना प्रदर्शन किया जाएगा।

इसमें उत्तराखंड सहित देश के अन्य राज्यों के अर्द्धसैनिक परिवार भी हिस्सा लेंगे। आइटीबीपी के पूर्व डीआइजी एसपी चमोली ने कहा कि राज्य सरकारें सुविधाओं के नाम पर अर्द्धसैनिक बलों के जवानों की अनदेखी कर रही हैं। उत्तराखंड समन्वयक तारादत्त शर्मा और मध्य प्रदेश इकाई के प्रदेश अध्यक्ष जयेंद्र सिंह राणा ने अर्द्धसैनिक बलों के लिए प्रत्येक जिले में सीजीएचएस की व्यवस्था, प्रत्येक एसपी दफ्तर में हेल्प डेस्क और बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल खोलने की मांग की।

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Edited By: Raksha Panthri