देहरादून, जेएनएन। यातायात नियमों के उल्लंघन पर अब कंप्यूटर ही चालानी रिपोर्ट तैयार करने के साथ चार्जशीट भी तैयार कर देगा। यातायात पुलिस की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए साफ्टवेयर का पांच थानों में ट्रायल सफल रहा है और जल्द ही इसे जिले के बाकी थानों के कंप्यूटर में भी इंस्टाल कर दिया जाएगा। 

यातायात अभिलेखों के डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया परवान चढ़ने लगी है। यातायात पुलिस एवं सीपीयू की ओर से मोटर वाहन अधिनियम के तहत किए जाने वाले चालान की रिपोर्ट अब कंप्यूटर स्वत: ही तैयार कर देगा। वहीं, विभिन्न धाराओं में चार्जशीट भी कंप्यूटर ही तैयार करेगा। 

इससे न्यायालय या परिवहन विभागों को रिपोर्ट भेजने में होने वाली लेटलतीफी को दूर करने के साथ थानों में काम का बोझ भी कम होगा। यातायात पुलिस इसके लिए साफ्टवेयर तैयार कराने को लेकर पिछले चार-पांच महीने से मंथन कर रहा था। 

पांच थानों में ट्रायल 

प्रथम चरण में यह सॉफ्टवेयर शहर कोतवाली, राजपुर, नेहरू कॉलोनी, रायपुर व डालनवाला कोतवाली के कंप्यूटरों में इंस्टाल किया जा चुका है। अन्य थानों में इसे जल्द ही इंस्टाल कर दिया जाएगा।

कार्रवाई का अपडेट रहेगा रिकार्ड

इस साफ्टवेयर पर काम शुरू होने के बाद भी चालानी रिपोर्ट का न तो अलग से रजिस्टर तैयार करना होगा और न ही इसके लिए अभिलेख खंगालने होंगे कि गाड़ी का कब-कब चालान हुआ है। यह सब एक क्लिक पर सामने होगा।

सफल रहा ट्रायल 

देहरादून के एसपी ट्रैफिक प्रकाश चंद्र के मुताबिक, यातायात अभिलेखों के डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। पांच थानों में ट्रायल सफल रहा है। इसे जल्द ही अन्य थानों में भी लागू कर दिया जाएगा। 

सॉफ्टवेयर के माध्यम से होगी गुमशुदा की पहचान

गुमशुदा बच्चों की पहचान कराने के लिए उत्तराखंड बाल सरंक्षण आयोग ने एक पहल की है। इस पहल का नाम है फेस रीडिंग सिस्टम सॉफ्टवेयर(एफआरएस)। जिसका संचालन विभाग और उत्तराखंड पुलिस के सहयोग से किया जाएगा।

उत्तराखंड बाल सरंक्षण आयोग की अध्यक्ष उषा नेगी ने बताया कि इस सॉफ्टवेयर को थानों, सरकारी छात्रावास और गैर सरकारी छात्रावास आदि से लिंक कराया जाएगा। इसमें सभी छात्र-छात्राओं का डाटा अपलोड किया जाएगा। अगर कभी किसी छात्र की गुमशुदगी थाने में दर्ज हुई और वह छात्र किसी अन्य राज्य में मिल जाता है तो उसकी पहचान एफआरएस से की जाएगी। 

उन्होंने बताया कि साफ्टवेयर का प्रस्ताव पहले ही पास हो चुका है। इसके विषय में वे जल्द डीआइजी से बैठक करेंगी और मार्च तक सॉफ्टवेयर लॉन्च किया जा सकता है। 

अपराध कर अब भाग नहीं पाएंगे अपराधी

अपराध कर अब अपराधियों के लिए भागना आसान नहीं होगा। टीवीएस कंपनी ने पुलिस को इसके लिए 10 हाइटेक बाइक भेंट की हैं। खास बात यह है कि इन बाइकों में पुलिस हूटर, सायरन सहित पब्लिक एड्रेस सिस्टम भी लगा है। 

पुलिस लाइन में आयोजित एक कार्यक्रम में कंपनी के अधिकारियों ने डीआइजी अरुण मोहन जोशी को बाइकों की चाबियां सौंपी। डीआइजी ने कंपनी के सीनियर मैनेजर जेएस राठौर एवं उनकी टीम का आभार जताया। उन्होंने कहा कि हाइटेक बाइकों के इस्तेमाल से पुलिस को अब अपराधियों का पीछा करने में आसानी होगी। 

उन्होंने कहा कि पुलिस टीम के पास यह अब तक की सबसे हाइटेक बाइकें हैं। यह बाइक थानों में नियुक्त वरिष्ठ उप निरीक्षकों को सौंपी जाएंगी। जिससे वह इन बाइकों का इस्तेमाल अपनी निगरानी में क्षेत्र के अपराध नियंत्रण में करेंगे। 

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कंपनी के जेएस राठौर ने बताया कि बाइकों को पुलिस को देने का मुख्य उद्देश्य पुलिस की कार्यक्षमता में वृद्धि करते हुए आमजन की सुरक्षा को प्रभावी कदम उठाना है। उन्होंने बताया कि बाइकों का इंजन 250 सीसी का होने के साथ-साथ इन पर पुलिस हूटर, सायरन, पुलिस कलर के फ्लैशर माइक एवं पब्लिक एड्रेस सिस्टम भी लगाए गए हैं। कार्यक्रम में एसपी सिटी श्वेता चौबे, सीओ ट्रैफिक राकेश देवली, सीओ मसूरी नरेंद्र पंत आदि मौजूद रहे।

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Posted By: Bhanu

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