राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड में केदारनाथ और पंचकेदार मंदिर समूहों के संरक्षण के लिए 'पंचकेदार सेक्रेड लैंड स्केप समिति' का गठन किया जाएगा। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में पूर्व राज्यसभा सदस्य और केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय संस्मारक प्राधिकरण के अध्यक्ष तरुण विजय भी मौजूद थे। इस मौके पर यह भी तय हुआ कि अल्मोड़ा के लखुडियार और ऋषिकेश के नजदीक चौरासी कुटी के संरक्षण के लिए केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय को राज्य की ओर से प्रस्ताव भेजा जाएगा।

कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के सुभाष रोड स्थित कैंप कार्यालय में हुई इस बैठक में विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। महाराज ने बताया कि केदारनाथ और पंचकेदार मंदिर समूहों के लिए पंचकेदार सेक्रेड लैंड स्केप समिति का गठन कर समय-समय पर उसकी बैठकें आयोजित की जाएंगी। इसके माध्यम से इस पूरे क्षेत्र के संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि देहरादून स्थित शौर्य स्थल में विद्युत संयोजन को लेकर भी बैठक में चर्चा की गई। इस संबंध में निर्देश दिए गए कि यह कार्य मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण के स्तर से कराया जाएगा। बैठक में सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर, एएसआई के पूर्व डीजी आरएस फोनिया, जिला पर्यटन अधिकारी देहरादून जयपाल चौहान आदि मौजूद थे।

शिथिलीकरण नियमावली फिर से लागू करने की मांग

सचिवालय संघ के अध्यक्ष दीपक जोशी ने उत्तराखंड सरकारी सेवक पदोन्नति के लिए अर्हकारी सेवा में शिथिलीकरण नियमावली-2010 पुन: लागू करने की मांग की है। इस सिलसिले में उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है।उन्होंने बताया है कि वर्ष 2016 तक शिथिलीकरण नियमावली-2010 के प्रविधानों के तहत कार्मिकों को उनके सेवाकाल में एक बार पदोन्नति के लिए अर्हकारी सेवा अवधि में 50 फीसद की छूट प्राप्त होती रही है।

कुछ संवर्गों के परस्पर गतिरोध के कारण शासन ने चार सितंबर 2017 को इस नियमावली के क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुए स्थानापन्न पदोन्नतियों और अर्हकारी सेवा में शिथिलीकरण को स्थगित कर दिया। उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेश के बाद 2018 में यह नियमावली स्वत: ही प्रभावी हो गई है, लेकिन कार्मिक विभाग ने अभी तक इस संबंध में कोई आदेश जारी नहीं किया है।

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Edited By: Raksha Panthri