देहरादून, [राज्य ब्यूरो]: मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का पैतृक गांव खैरासैंण अब पर्यटन विकास के लिहाज से भी चमक बिखेरेगा। '13 जिले-13 पर्यटक स्थल' योजना में खैरासैंण को भी शामिल किया गया है, जिसे बुधवार को टिहरी में हुई कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दी गई।

इस योजना के तहत सतपुली से लेकर खैरासैंण तक पर्यटन के लिहाज से तमाम गतिविधियां संचालित की जाएंगी। इस कड़ी में खैरासैंण और सतपुली में पूर्वी नयार नदी में झील बनाकर पर्यटकों को आकर्षित करने की योजना भी है।

कोटद्वार-पौड़ी राजमार्ग पर पूर्वी नयार नदी के तट पर बसे सतपुली कस्बे से महज चार किलोमीटर के फासले पर है खैरासैंण गांव। एक दौर में यहां स्थित राजकीय इंटर कॉलेज क्षेत्र के दर्जनों गांवों के विद्यार्थियों की शिक्षा का मुख्य केंद्र था। पौड़ी जिले के जयहरीखाल विकासखंड की मल्ला बदलपुर पट्टी के अंतर्गत आने वाला पूर्वी नयार नदी से कुछ ही फासले पर बसा खैरासैंण समृद्ध खेती-बाड़ी के लिए भी मशहूर है।

मुख्यमंत्री की पहल पर स्वैच्छिक चकबंदी की ओर भी यहां के निवासियों ने कदम बढ़ाए हैं। वर्तमान में लगभग 75 परिवारों वाले इस गांव को अब पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके तहत सतपुली से लेकर खैरासैंण तक पर्यटन विकास की विभिन्न गतिविधियां संचालित की जाएंगी।

यही नहीं, सतपुली व खैरासैंण में पूर्वी नयार नदी पर झील बनाने की योजना पाइपलाइन में है। यही नहीं, होम स्टे समेत अन्य योजनाएं भी इन क्षेत्रों में संचालित की जाएंगी, ताकि रोजगार के अवसर सृजित होने के साथ ही क्षेत्र की आर्थिकी संवर सके। खैरासैंण के पर्यटक स्थल बनने पर यहां आने वाले सैलानियों के लिए प्रसिद्ध श्री ताड़केश्वरधाम पहुंचना भी बेहद आसान होगा। 

देवदार के वनों के बीच स्थित यह सुरम्य स्थली महज 15 किमी के फासले पर है। यही नहीं, गढ़वाल राइफल्स का मुख्यालय छावनी नगर लैंसडौन की दूरी भी खैरासैंण से 35 किमी के आसपास है। जाहिर है कि इन स्थलों में तो सैलानी जाएंगे ही, आसपास के क्षेत्र के भी विकसित होंगे।

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