देहरादून, राज्य ब्यूरो। सरकार के कार्यकाल के तीन वर्ष पूरे होने के हैं, लेकिन अभी तक अफसरशाही के साथ विधायकों की पटरी मेल नहीं खा रही है। कभी अफसर विधायकों के फोन नहीं उठाते तो कार्यालय पहुंचने के बावजूद उनसे मुलाकात नहीं हो रही है। विधायकों ने जब यह मसला मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के सामने उठाया तो उन्होंने इसके लिए नई व्यवस्था बना दी। नई व्यवस्था के अनुसार हर बुधवार को आधे दिन और गुरुवार को पूरे दिन मुख्यमंत्री, मंत्री, सचिव व जिलों में जिलाधिकारी समेत अन्य अधिकारी अपने कार्यालय में बैठेंगे। मकसद यह कि जनप्रतिनिधि उनसे मुलाकात कर समस्याओं का निस्तारण कर सकें।

गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम में चर्चा के दौरान विधायक खासे मुखर रहे। उन्होंने मुख्यमंत्री के सामने अफसरशाही द्वारा जनप्रतिनिधियों के फोन न उठाने और उनके प्रस्तावों पर सुस्त रफ्तार से काम करने तक का आरोप लगाया। इस पर मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे विधायकों के नंबर अपने पास रखें और विधायकों के फोन तत्काल उठाएं। उन्होंने विधायकों से ऐसे अधिकारियों के नाम उन्हें देने को कहा जो फोन नहीं उठाते हैं। इस दौरान यह बात भी उठाई गई कि भावी पीढ़ी माटी से दूर जा रही है। कृषि खेती से विमुख हो रही है।

इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिए दसवीं कक्षा तक कृषि विषय को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। विधायकों ने कहा कि प्रदेश में केवल ऊर्जा और सड़क निर्माण का काम ही नजर आ रहा है। स्वास्थ्य व सिंचाई के कार्य सुस्त रफ्तार से चल रहे हैं। इनमें तेजी लाने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में विकास कार्य हो रहे हैं लेकिन कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। विधायकों ने यह तक कहा कि अब चुनाव के लिए केवल दो वर्ष बचे हैं। ऐसे में अब चर्चा नहीं बल्कि एक्शन का समय है। 

विधायकों ने ये दिए सुझाव

-बिशन सिंह चुफाल ने मंडुवा क्लस्टर के स्थान पर मसाला क्लस्टर बनाने पर दिया जोर।

-महेश नेगी ने कहा कि आपदा में भवनों के क्षतिग्रस्त होने पर मुआवजा राशि में सुधार किया जाए।

-संजीव आर्य ने दैवीय आपदा के वन पंचायत में बंजर भूमि को वनीकरण के लिए उपयोग में लाने की कही बात।

-पुष्कर सिंह धामी ने अटल आयुष्मान योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की जरूरत बताई।

-राजेश शुक्ला ने मुख्य सचिव स्तर पर विधायकों के क्षेत्रों से संबंधित योजनाओं का अनुश्रवण करने का दिया सुझाव।

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-सौरभ बहुगुणा ने मटर व लाई की फसलों का भी मुआवजा देने की कही बात।

-भरत सिंह चौधरी ने रुद्रप्रयाग सैनिक स्कूल के शीघ्र निर्माण की मांग की।

-दिलीप सिंह रावत ने आठवीं या 10 वीं कक्षा में कृषि को शामिल करने का दिया सुझाव।

-गोपाल रावत  ने पुलों के निर्माण व पॉलिटेक्निक की मांग की।

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