देहरादून, राज्य ब्यूरो। सरकार ने राज्य के सभी शहरों को साफ-सुथरा बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की ठानी है। इस कड़ी में केंद्र की पहल पर चल रहे स्वच्छ भारत मिशन से इतर सरकार खुद भी अपने शहरों को स्वच्छता की कसौटी पर परखेगी। इसके लिए सालभर के प्रदर्शन के आधार पर निकायों की स्वच्छता रैंकिंग तय होगी। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक के मुताबिक बेहतर प्रदर्शन करने वाले निकायों को विकास कार्यों के लिए विशेष ग्रांट दी जाएगी।

केंद्र सरकार प्रति वर्ष स्वच्छता सर्वेक्षण के जरिये देश के शहरों को विभिन्न बिंदुओं को लेकर स्वच्छता की कसौटी पर परखती है। इसके तहत जनता की राय और नगर निकायों के दावों और दस्तावेजों के परीक्षण के साथ ही केंद्र सरकार खुद स्थलीय परीक्षण भी कराती है। इसके आधार पर शहरों को अंक दिए जाते हैं और फिर तैयार होती है रैंकिंग। अब इसी तर्ज पर उत्तराखंड में राज्य सरकार भी खुद की पहल करने जा रही है।
गढ़वाल मंडल के निकाय प्रमुखों की अभिमुखीकरण कार्यशाला के दरम्यान पत्रकारों से बातचीत में शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि केंद्र का स्वच्छता सर्वेक्षण अपनी जगह चलता रहेगा, लेकिन राज्य सरकार भी खुद अपने शहरों पर निगाह रखेगी। सरकार की मंशा सभी शहरों को साफ-सुथरा बनाने की है। उन्होंने बताया कि सरकार हर माह यह देखेगी कि किस नगर निकाय ने स्वच्छता के क्षेत्र में क्या कार्य किया है।
कैबिनेट मंत्री कौशिक के अनुसार इसके बाद सालभर की परफॉर्मेंस रिपोर्ट के आधार पर निकायों को अंक दिए जाएंगे। इसके आधार पर इनकी रैंकिंग तय होगी। बेहतर प्रदर्शन करने वाले निकायों को सरकार की ओर से विशेष ग्रांट दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस पहल से जहां निकाय स्वच्छता के लिए और अधिक प्रेरित होंगे, वहीं वे कमियां भी दूर हो सकेंगी, जिनके कारण राज्य के निकाय देश के शहरों की स्वच्छता रैंकिंग में शामिल नहीं हो पाते। उन्होंने बताया कि जल्द ही इस योजना का खाका धरातल पर उतारा जाएगा।

 

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