देहरादून, जेएनएन। केंद्रीय विद्यालय आइटीबीपी में आयोजित 27वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में भावी पीढ़ी ने न केवल समस्याएं उठाई, बल्कि उनका निदान भी सुझाया। इस आयोजन में देहरादून संभाग से 34 केंद्रीय विद्यालयों के 138 बाल वैज्ञानिक हिस्सा ले रहे हैं। 

गुरुवार को दो दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. यूएस रावत ने किया। उन्होंने बाल प्रतिभाओं में विद्यमान अपार संभावनाओं को इंगित करते हुए उनकेप्रस्फुटन की आवश्यकता बताई। कहा कि विद्यार्थी नवीनतम शोध कर देश को स्वावलंबी बनाएं। डॉ. रावत ने बाल वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि किसी भी वैज्ञानिक सोच को आविष्कार के रूप में परिणित करने से पहले इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि मानवता के अभाव में विज्ञान, चरित्र के अभाव में शिक्षा और सिद्धांतों के अभाव में राजनीति का कोई महत्व नहीं है। 

विद्यालय के प्रधानाचार्य संजय कुमार ने सभी प्रतिभागियों और अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि विज्ञान कांग्रेस का मुख्य विषय, 'स्वच्छ, हरित और स्वस्थ राष्ट्र के लिए विज्ञान' है। जिसे पांच उप विषयों पारिस्थितिकी, स्वास्थ्य और सैनीटेशन, कचरे से समृद्धि, सोसायटी कल्चर व जीवन्तता और पारंपरिक ज्ञान में विभाजित किया गया है। गुरुवार को बाल वैज्ञानिकों ने सामयिक समस्याओं पर वैज्ञानिक समाधान प्रस्तुत करते हुए अपने लघु शोध प्रस्तुत किए।

बाल कांग्रेस में 17 बाल वैज्ञानिकों का चयन किया जाएगा, जो राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में केवि का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस दौरान केंद्रीय विद्यालय संगठन देहरादून संभाग के प्रभारी उपायुक्त विनोद कुमार, सहायक आयुक्त अलका गुप्ता, पूर्व सहायक आयुक्त जेएस भंडारी, केवि आइआइपी की प्रधानाचार्य मिक्की खुल्बे, विद्यालय के उप प्रधानाचार्य सचिन राठौर आदि उपस्थित रहे। उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. संगीता डोभाल ने किया। 

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Posted By: Raksha Panthari

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