मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

जागरण संवाददाता, देहरादून: ऑल इंडिया आर्गेनाइजेशन ऑफ कैमिस्ट एंड ड्रगिस्ट ने दवाइयों की ऑनलाइन बिक्री का कड़ा विरोध किया है। केंद्र सरकार द्वारा इंटरनेट के जरिये दवाओं की बिक्री करने या किसी भी रूप में ई-फार्मेसी चलाने की अनुमति देने के विरोध में आगामी 28 सितंबर को दवा की दुकानें बंद रहेंगी।

कैमिस्ट एसोसिएशन, देहरादून के महानगर अध्यक्ष टीएस अग्रवाल का कहना है कि यदि दवाओं की ऑनलाइन बिक्री की अनुमति दी जाती है तो न सिर्फ कैमिस्ट को व्यवसायिक नुकसान होगा, बल्कि व्यापक पैमाने पर जनता के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। इसका नुकसान तकनीकी जानकार युवा पीढ़ी के लिए भी होगा। क्योंकि ऑनलाइन वह दवाएं भी धड़ल्ले से खरीदी या बेची जाएंगी, जो प्रतिबंधित हैं। उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में कई मर्तबा संबंधित मंत्रालय व विभागों को भी ज्ञापन देकर अनुरोध किया गया है। लेकिन अब तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है। जबकि संबंधित महकमों को तथाकथित ई-फार्मेसीज, पोर्टल्स व इंटरनेट द्वारा की जा रही दवाओं की अवैध ऑनलाइन बिक्री के अनेक मामलों का हवाला दिया गया है। संघ का ये है कहना

- ऑनलाइन कंपनिया बिना जवाबदेही चल रही हैं और प्रिस्क्रिप्शन की सत्यता प्रमाणित किए बिना ऑर्डर पास कर रही हैं।

- एमटीपी किट, सिल्डेनाफिल, टाडालाफिल जैसी दवाइया, कोडीन जैसी लत डालने वाली दवाइया आरएमपी के प्रिस्क्रिप्शन के बगैर बेची जा रही हैं।

- अनुसूचित दवाइया जिन्हें गायनेकोलॉजिस्ट, साइकैट्रिस्ट आदि जैसे विशेषज्ञ डॉक्टरों के प्रिस्क्रिप्शन पर ही दिया जाता है, सीधे या अयोग्य प्रैक्टिश्नर्स के जरिये सप्लाई की जा रही हैं।

- दवाइयों को पुराने या छेड़छाड़ किए गए प्रिस्क्रिप्शन पर बेचा जा रहा है।

- हर प्रिस्क्रिप्शन पर कमीशन पाने के लिए मरीजों की जाच किए बगैर ही फर्जी ई-प्रिस्क्रिप्शन जेनरेट किया जा रहा है।

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप