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पिता करते हैं मजदूरी और मां घरों में काम, अभावों से निकलकर देहरादून की चांदनी संवार रही 110 बच्चों का भविष्य

Published: Thu, 15 Oct 2026 03:32 PM (IST)

19 वर्षीय चांदनी, जो कभी खुद 'उड़ान पाठशाला' की छात्रा थीं, अब वहीं अभावग्रस्त बच्चों को शिक्षा दे रही हैं।

सुभाषनगर स्थित अपने सपने एनजीओ की उड़ान पाठशाला में बच्चों को पढ़ाती चांदनी। साभार पाठशाला

सुभाषनगर स्थित अपने सपने एनजीओ की उड़ान पाठशाला में बच्चों को पढ़ाती चांदनी। साभार पाठशाला

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सुमित थपलियाल, देहरादून। जिस उम्र में युवा अपने सपनों को आकार देने में जुटे रहते हैं, उस उम्र में 19 वर्षीय चांदनी दूसरों के सपनों को पंख लगा रही हैं। उसने अभावों को नजदीक से देखा है लिहाजा जरूरतमंदों को आखर ज्ञान देकर उनके सपनों में उम्मीद की रोशनी भर रही हैं।

कभी खुद जिस उड़ान पाठशाला में पढ़कर उन्होंने आगे बढ़ने की राह पकड़ी थी, आज उसी पाठशाला में शिक्षिका बनकर 110 जरूरतमंद बच्चों का भविष्य संवार रही हैं। दिहाड़ी मजदूर पिता और घरों में काम करने वाली मां की बेटी चांदनी की कहानी बताती है कि शिक्षा से मिली एक छोटी-सी राह भी बदलाव की बड़ी वजह बन सकती है।

चांदनी के पिता राम महेश दिहाड़ी मजदूरी करते हैं, जबकि मां शिवकला लोगों के घरों में काम करती हैं। आर्थिक चुनौतियों के बीच चांदनी ने पढ़ाई जारी रखी। वर्ष 2015 में अपने सपने संस्था के संस्थापक अरुण यादव उन्हें सुभाषनगर स्थित उड़ान पाठशाला लेकर आए। यहां शिक्षा हासिल करने के बाद चांदनी ने जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाने का संकल्प लिया। वर्तमान में वह उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से बीए कर रही हैं और प्रतिदिन दो से तीन घंटे पाठशाला में बच्चों को पढ़ाती हैं।

50 बच्चों से शुरू हुआ यह सफर अब 110 तक पहुंचा

विभिन्न क्षेत्र की बस्तियों में बच्चों को शिक्षा से दूर देखकर चांदनी ने उन्हें उड़ान पाठशाला तक लाने की पहल की। धीरे-धीरे बच्चों की संख्या बढ़ती गई। पांच साल पहले 50 बच्चों से शुरू हुआ यह सफर अब 110 बच्चों तक पहुंच चुका है। चांदनी के लिए यह जिम्मेदारी केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं, बल्कि बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर देने का प्रयास भी है।

बच्चों की भी प्यारी हैं चांदनी

पाठशाला में पढ़ने वाली निशा बताती हैं कि चांदनी मैडम कठिन सवालों पर डांटने के बजाय प्यार से समझाती हैं। शिवानी भी उन्हें अपनी सबसे अच्छी शिक्षिका मानती हैं। बच्चों के साथ उनका अपनापन पढ़ाई के प्रति उनमें रुचि जगाता है।

सामाजिक सहयोग से मिल रहा शिक्षा का अवसर

उड़ान पाठशाला अपने सपने एनजीओ के तहत संचालित है। सामाजिक और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोग व विभिन्न संगठन बच्चों की पढ़ाई और स्टेशनरी के लिए सहयोग देते हैं। इससे जरूरतमंद बच्चों को पढ़ने का अवसर मिल रहा है।