जागरण संवाददाता, हरिद्वार: विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के केंद्रीय उपाध्यक्ष एवं श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के महामंत्री चंपत राय ने कहा कि सरकारी कब्जे से मंदिरों को मुक्ति मिलनी चाहिए। साथ ही मंदिरों का संचालन हिंदू समाज को ही करना चाहिए। मंदिरों की संपत्ति व वहां आए दान का उपयोग हिंदुओं, मंदिरों के रखरखाव और धार्मिक प्रचार के लिए होना चाहिए।

हरिद्वार में प्रेस से मिलिए कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार के देवस्थानम बोर्ड समाप्त किए जाने संबंधी निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने यह बात कही। वहीं, शुक्रवार को उन्होंने कनखल स्थित श्रीपंचायती अखाड़ा निर्मल पहुंचकर अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञानदेव ङ्क्षसह महाराज से मुलाकात की।

मंदिर निर्माण शैली पर इंजीनियर करेंगे शोध

श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के महामंत्री चंपत राय ने कहा कि अयोध्या में मंदिर की निर्माण शैली पर आने वाले समय में इंजीनियर शोध करेंगे। क्योंकि, देश के किसी भी मंदिर पर सौ साल में इतना बड़ा स्टोन वर्क नहीं हुआ। मंदिर का निर्माण ढाई से पौने तीन एकड़ में हो रहा है। यदि चहारदीवारी और यात्री सुविधाओं को शामिल कर लें तो यह 18 एकड़ हो जाएगा। मंदिर परिसर में जूते और मोबाइल लाने पर रोक रहेगी। बताया कि अभी पांच से दस हजार लोग रोजाना आते हैं, भविष्य में यह संख्या और बढ़ेगी। सो, इसे देखते हुए मंदिर परिसर को 108 एकड़ करने पर विचार चल रहा है। सौ बसों की क्षमता वाला बस अड्डा और पार्किंग की व्यवस्था की जा रही है। जाम से निजात दिलाने को सड़क फोर लेन की जा रही हैं।

मंदिर निर्माण को पर्याप्त चंदा

न्यास के महामंत्री ने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए भारत के अलावा किसी और देश से चंदा नहीं आया है। 11 करोड़ व्यक्तियों ने 40 दिन (14 जनवरी से 27 फरवरी) में समर्पण सम्मान निधि में 3200 करोड़ रुपये का चंदा जमा किया। बताया कि मंदिर तीन मंजिला होगा। इसमें भूतल पर 170, प्रथम तल पर 150 और द्वितीय तल पर 80 पिलर होंगे। छत की ऊंचाई 20 फीट होगी।

नींव में वाइब्रो तकनीक का इस्तेमाल

न्यास के महामंत्री ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट ने मंदिर निर्माण के लिए इंजीनियरों की एक टीम बनाई। इसमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) दिल्ली, आइआइटी रुड़की, आइआइटी गुवाहाटी समेत देश की अन्य शीर्ष संस्थाओं के वरिष्ठ इंजीनियर भी शामिल हुए। निर्माण करीब 110 एकड़ की भूमि पर हो रहा है, जबकि ट्रस्ट को कुल 67 एकड़ जमीन मिली थी। नींव के लिए मिट्टी की पहचान और अध्ययन किया गया तो मालूम पड़ा कि 161 फीट ऊंचे मंदिर के लिए मौजूदा स्थिति कमजोर पड़ सकती है। नींव में वाइब्रो तकनीक से आठ-आठ इंच मोटी कुल 44 परत डाली गई हैं। पूरी नींव में कुल 125 लाख क्यूबिक फीट सामग्री लग रही है। इसमें करीब 71 लाख क्यूबिक फीट सामग्री लग चुकी है। मंदिर भूकंपरोधी होगा।

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Edited By: Raksha Panthri