'अशोक सिंघल ने साल 2012 में कही थी नरेंद्र मोदी को देश का नेतृत्व सौंपने की बात'; देहरादून में बोले चंपत राय
चंपत राय ने विश्व हिंदू परिषद के शताब्दी समारोह में अशोक सिंघल के जीवन और कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने ...और पढ़ें
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राजकीय दून मेडिकल कॉलेज सभागार में रविवार को अशोक सिंघल शताब्दी वर्ष समारोह में विचार व्यक्त करते विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व श्रीराम जन्मभू्मि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय
HighLights
सिंघल ने 2012 में मोदी को नेतृत्व सौंपने की बात कही।
अशोक सिंघल का जीवन हिंदू धर्म की रक्षा को समर्पित।
उन्होंने राम मंदिर निर्माण और धर्म संसद का आयोजन किया।
राज्य ब्यूरो, देहरादून। विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व श्रीराम जन्मभू्मि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने कहा कि अशोक सिंघल का पूरा जीवन देश की एकता, हिंदू धर्म की रक्षा और हिंदू समाज को संगठित करने के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि उन्हें अशोक सिंघल के साथ कुछ समय बिताने का अवसर मिला।
सिंघल ने वर्ष 2012 में ही नेतृत्व परिवर्तन की आवश्यकता जताते हुए नरेन्द्र मोदी को पार्टी की कमान सौंपने की बात कही थी और किस प्रांत से भाजपा को कितनी सीटें प्राप्त हो रही हैं, इसका भी लेखा-जोखा सामने रखा। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा को करीब उतनी ही सीटें प्राप्त हुई।
रविवार को विश्व हिंदू परिषद की ओर से आयोजित अशोक सिंघल शताब्दी वर्ष समारोह का आयोजन पटेलनगर स्थित राजकीय दून मेडिकल कॉलेज सभागार में किया गया। समारोह में चंपत राय ने कहा अशोक सिंघल बचपन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक रज्जू भैया के संपर्क में आने के बाद राष्ट्र और धर्म की सेवा में जुट गए।
विज्ञान के छात्र रहे अशोक सिंघल ने वर्ष 1950 में विज्ञान की पढ़ाई छोड़कर हिंदी ग्रंथों और मठ-मंदिरों की सेवा का मार्ग चुना। उनका जीवन सादगी से भरा था और उन्होंने अनेक राष्ट्रीय सम्मेलनों का आयोजन किया। चंपत राय ने बताया कि अशोक सिंघल के तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से भी मैत्रीपूर्ण संबंध थे।
दोनों दिल्ली में आमने-सामने रहते थे। उन्होंने केरल के एक गांव में कथित मतांतरण का विरोध किए जाने का प्रसंग साझा करते हुए कहा कि इस मामले में इंदिरा गांधी ने भी विरोध जताया था। उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल ने नई दिल्ली में पहली बार धर्म संसद का आयोजन किया, जिनमें 600 से अधिक साधु-संतों ने भाग लिया।
उन्होंने देश के प्रमुख अखाड़ों को एकजुट कर उनके कार्यों को यज्ञ की संज्ञा दी। गंगा, गाय और हिंदू धर्म की रक्षा के साथ देशभक्ति की भावना को समाज में मजबूत करने के लिए उन्होंने लगातार काम किया। वर्ष 1986 में उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर का प्रारंभिक नक्शा तैयार किया। मंदिर निर्माण के लिए पत्थरों की जांच आइआइटी रुड़की की प्रयोगशाला में कराई गई।
