विकासनगर, [जेएनएन]: केंद्रीय मंत्री उमा भारती का कहना है कि यमुना को बचाने में जल विद्युत परियोजनाओं के साथ ही जनसहभागिता भी बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि गंगा और यमुना सिर्फ नदियां नहीं बल्कि भारत की संस्कृति का प्रतीक और लोगों की आस्था का केंद्र है। इन्हीं नदियों से देश का विकास भी संभव है। 

उत्तरकाशी से लौटने के बाद केंद्रीय मंत्री उमा भारती सुबह कुछ देर के लिए डाकपत्थर स्थित सिंचाई विभाग के अतिथि गृह में रुकी। यहां मीडिया से रूबरू होते हुए उन्होंने गंगा की तर्ज पर यमुना को बचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इसके लिए जल विद्युत परियोजनाओं के साथ ही स्थानीय जन मानस की सहभागिता भी जरूरी है। लखवाड़ व्यासी परियोजना के निर्माण की सुस्त गति पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कुछ योजनाओं का निर्माण तय समय में नहीं हो पाता है, लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि सरकार निर्माण में ढिलाई बरत रही है। कहा कि सभी जल विद्युत परियोजनाएं समय पर पूरी हो जाएंगी। 

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गंगा व यमुना सिर्फ नदियां ही नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति की प्रतीक व भारतीय जनमानस की आस्था का केंद्र हैं। इसके साथ ही इन्हीं नदियों से भारत का विकास संभव है। गंगा की तर्ज पर यमुना को बचाने की जरूरत है। इसके लिए जल विद्युत परियोजनाएं तो कारगर होंगी ही, साथ ही स्थानीय जन मानस की सहभागिता भी जरूरी है। प्रत्येक व्यक्ति को संकल्प लेना होगा कि यमुना को प्रदूषण मुक्त करना है। 

उमा भारती ने कहा कि लखवाड़-व्यासी, किसाऊ व रेणुका जल विद्युत परियोजना यमुना को बचाने में सहायक होंगी। उन्होंने स्थानीय जनता से नदी किनारों को स्वच्छ रखने, जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण में अनावश्यक व्यवधान पैदा नहीं करने की अपील की है। इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ ही तहसील प्रशासन के आला अधिकारी मौजूद रहे।

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Posted By: Raksha Panthari

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