संवाद सूत्र, चकराता/त्यूणी: करीब 20 साल बाद पांडवकालीन महत्व के देवनगरी लाखामंडल में थाती-माटी की पूजा की जाएगी। इसके लिए स्थानीय ग्रामीणों ने तैयारी शुरू कर दी है। धार्मिक अनुष्ठान से पूर्व ग्रामीणों ने भैरव देवता के चांदी का नया छतर बनाया है, जिसे हरिद्वार के गंगाजी में स्नान कराने के बाद शिव मंदिर में स्थापित किया गया।

लोक परंपरा के अनुसार जौनसार के लाखामंडल में 20 साल में एक बार पांडवों की भूमि कहे जाने वाले थाती-माटी का पूजन विधि-विधान से होता है। स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि, इस बार पांडवों के थाती-माटी की पूजा-अर्चना 15 दिसबंर को परंपरागत तरीके से होगी। इस धार्मिक अनुष्ठान के आयोजन से ग्रामीणों ने भैरव देवता के चांदी का नया छतर बनाया है। गंगाजी में स्नान कराने के लिए लाखामंडल के पूर्व प्रधान सुरेश शर्मा, पूर्व प्रधान बूटाराम गौड़, देवमाली बुद्वराम व पप्पू शर्मा हरिद्वार ले गए। वहां से वापस लौटने के बाद मंदिर के कारसेवकों ने शिव ज्योर्तिलिग की पूजा-अर्चना कर देवता के छतर को शाही स्नान कराने के उपरांत उसे विधि-विधान से शिव मंदिर में स्थापित किया। जौनसार-बावर जन कल्याण विकास समिति की अध्यक्ष बचना शर्मा ने कहा लाखामंडल में सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार थाती-माटी की पूजा को आयोजित होने जा रहे धार्मिक अनुष्ठान में बोंदूर खत से जुड़े करीब चौबीस गांवों के सैकड़ों लोग शामिल रहेंगे। इसके अलावा इस योजना में अन्य जगह से भी बड़ी संख्या में लोग देव परंपरा का हिस्सा बनने को लाखांमडल स्थित शिव मंदिर आते हैं। थाती-माटी की विशेष पूजा-अर्चना के लिए ग्रामीणों ने तैयारी शुरू कर दी है। इस मौके पर समिति के संयोजक ओम प्रकाश काला, नरेश बहुगुणा, बाबूराम शर्मा, आसाराम शर्मा, राजेंद्र शर्मा, केशव शर्मा, उत्तमचंद गौड़, मनोज गौड़ आदि मौजूद रहे।

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