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संवाद सूत्र, रायवाला: मेले और त्योहार हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की पहचान हैं। यह हमारी विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराओं की बहुमूल्य धरोहर को संरक्षित रखने के साथ ही समाज को एकता के सूत्र में पिरोने तथा सामाजिक सौहार्द बनाए रखने में अहम योगदान देते हैं। ऐसा ही एक त्योहार है हरितालिका तीज। मुख्य रूप से गोर्खाली समुदाय द्वारा मनाए जाने वाला यह पर्व भारत और नेपाल के सांस्कृतिक रिश्तों की मजबूत डोर है। दोनों देशों में इस पर्व को हर्षोल्लास से मनाया जाता है।

नेपाल से भारत में आकर बसे लोग वहां से अपनी विशिष्ट संस्कृति और रीति रिवाज भी साथ लेकर आए। साठ के दशक में रायवाला क्षेत्र में बसे गोर्खाली समुदाय के लोगों ने यहां घस्यारी देवी मंदिर में परंपरागत तीज मेले की शुरुआत की। भारतीय संस्कृति के स्वभाव के अनुरूप यहां के मूल गढ़वाली और अन्य समुदाय के लोगों ने भी इसे अपनाया और मेले में बढ़चढ़ कर योगदान दिया। तब आम प्रचलित भाषा में गोर्खा मेले के नाम से प्रसिद्ध हुए इस मेले ने समय के साथ विस्तृत रूप से लिया। मेले के साथ रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते हैं जिसमें सभी समुदायों के लोग हर्षोल्लास से शिरकत करते हैं।

पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य किया

गोर्खाली सुधार सभा की ओर से आइडीपीएल स्थित दुर्गा मंदिर में हरितालिका तीज महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। गोर्खाली समुदाय की महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सांस्कृतिक कार्यक्रमों व नृत्य की प्रस्तुति दी। इस दौरान तीज के गीत भी गाए गए। इस मौके पर समिति की अध्यक्ष माया घले, उपाध्यक्ष दलीप ¨सह बोहरा, लक्ष्मी सजवाण, ऊषा रीमाल, गीता राणा, मगली थापा आदि उपस्थित रहे।

Posted By: Jagran