चरस बरामदगी के मुकदमे की जांच फिर CBI के हवाले, छह पुलिसकर्मियों पर दर्ज हुआ मुकदमा
ऊधमसिंह नगर के केलाखेड़ा थाने में 2020 के 97.70 ग्राम चरस बरामदगी मामले की जांच अब सीबीआई करेगी।


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जागरण संवाददाता, देहरादून। ऊधमसिंह नगर के केलाखेड़ा थाने में वर्ष 2020 में दर्ज 97.70 ग्राम चरस बरामदगी के मुकदमे की जांच अब सीबीआइ करेगी। हाईकोर्ट के 11 अगस्त 2026 के आदेश के अनुपालन में सीबीआइ ने 28 जुलाई 2020 को दर्ज मूल एनडीपीएस मुकदमे को अपने हाथ में लेकर नियमित केस के रूप में दोबारा पंजीकृत किया है।
इस मामले में अनिल शर्मा को कथित रूप से झूठे मुकदमे में फंसाने और साक्ष्य गढ़ने के आरोप लगे हैं। पुलिस की भूमिका को लेकर छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ सीबीआइ पहले से ही मुकदमा दर्ज कर जांच कर रही है।
28 जुलाई 2020 को केलाखेड़ा पुलिस ने अनिल शर्मा के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस के अनुसार उसके कब्जे से 97.70 ग्राम चरस बरामद हुई थी। अनिल शर्मा व एक अन्य ने मुकदमा निरस्त कराने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
इस याचिका में बरामदगी को झूठा बताते हुए पुलिस पर फंसाने के लिए कार्रवाई करने और साक्ष्य तैयार करने के आरोप लगाए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने सात अगस्त 2020 को सीबीआइ को प्रारंभिक जांच के निर्देश दिए। सीबीआइ ने 17 अगस्त 2020 को अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की। इसमें चरस बरामदगी प्रथमदृष्टया संदिग्ध और झूठी पाए जाने व अनिल शर्मा को फंसाने के लिए साक्ष्य तैयार किए जाने की बात सामने आई थी।
छह पुलिसकर्मियों पर दर्ज हुआ मुकदमा
सीबीआइ की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे। हाईकोर्ट ने 19 अगस्त 2020 को संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर जांच के निर्देश दिए।
इसके बाद सीबीआइ की एसीबी देहरादून शाखा ने तत्कालीन उप निरीक्षक प्रकाश चंद्र टम्टा समेत त्रिभुवन सिंह, चंदन सिंह बिष्ट, हरीश गिरी, परवेज अहमद और राजवंत सिंह के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र समेत भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। पुलिसकर्मियों ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को दोबारा सुनाई के आदेश दिए थे।
हाईकोर्ट ने कहा, पुलिस की निष्पक्षता पर संदेह
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 11 अगस्त 2026 को पुलिस की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उसका आचरण निष्पक्ष जांच करने की क्षमता को लेकर उचित संदेह पैदा करता है।
कोर्ट ने माना कि अनिल शर्मा के खिलाफ दर्ज एनडीपीएस मुकदमे और उसे झूठा फंसाने व पुलिस ज्यादती के आरोप, दोनों की जांच सीबीआइ से कराया जाना उचित है। इसके बाद हाईकोर्ट ने सीबीआइ देहरादून को पहले से दर्ज पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमे की जांच जारी रखने के साथ 2020 के मूल एनडीपीएस मुकदमे की जांच भी सौंप दी।
