बच्चा बदलने के आरोप में नर्स व अस्पताल के खिलाफ मुकदमा

जागरण संवाददाता, विकासनगर : मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट देहरादून लक्ष्मण सिंह के आदेश पर पुलिस ने विकासनगर के सरकारी अस्पताल और वहां कार्यरत नर्स के खिलाफ बच्चा बदलने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर लिया है।

गुलिस्ता नाम की महिला ने अपने अधिवक्ता इकबाल अहमद के माध्यम से न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट देहरादून में प्रार्थना पत्र देकर कहा था कि वह जब गर्भवती थी तो उसका उपचार उप जिला चिकित्सालय विकासनगर में चल रहा था। 11 मई 2022 को उसे डिलीवरी के लिए सरकारी अस्पताल विकासनगर में भर्ती किया गया। उसे सरकारी अस्पताल में नर्स अफरोज जहां ने नशे का इंजेक्शन देकर बेड पर लिटा दिया। जब उसे होश आया तो नर्स ने कहा कि बच्चे को उठा ले। जब उसने उठकर नवजात को देखा तो वह लड़की थी। उसने नर्स से इस बारे में पूछा तो नर्स ने धमकी दी कि यदि उसने कुछ किया या कहा तो उसे 5 साल की सजा करा दी जाएगी। उसे उसके पति से भी नहीं मिलने दिया गया। महिला ने आरोप लगाया कि उसको बेटा हुआ था, लेकिन उसके बच्चे को बदल दिया गया। उसको लड़के की जगह लड़की दी गई। तब उसने मांग की थी कि उसे जो बच्ची दी गई है उसका डीएनए टेस्ट कराया जाए। जब उसने इसकी शिकायत कोतवाली विकासनगर व एसएसपी देहरादून से की तो कोई कार्रवाई नहीं की गई। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उपलब्ध पत्रावली का अवलोकन किया। जिसमें महिला ने सरकारी अस्पताल विकासनगर व अस्पताल में कार्यरत नर्स पर बच्चा बदलने का आरोप लगाया। कहा कि अस्पताल की नर्स ने उसे नशे का इंजेक्शन लगाकर बेहोश कर दिया था। जब उसे होश आया तो उसके पास बेड पर बेटे की जगह बच्ची मिली। महिला ने प्रार्थना पत्र में बच्चा चोरी अथवा हेराफेरी करने का आरोप लगाया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मामले को मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा बताते हुए मुकदमा दर्ज कर जांच के आदेश दिए थे। कोतवाली के एसएसआइ दीपक मैठाणी के अनुसार न्यायालय के आदेश पर नर्स व सरकारी अस्पताल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।

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