देहरादून, राज्य ब्यूरो। पुलिस विभाग की लापरवाही के कारण सरकार को वाहनों के जुर्माना वसूलने में 3.17 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है। 

रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड शासन ने नौ अगस्त 2017 को जुर्माने की दरों में संशोधन किया था। इसके तहत नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने की राशि 100 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये की गई थी। बावजूद इसके पुलिस पुरानी दरों पर ही चालान काटती रही। इसका खुलासा सितंबर 2017 में हुआ। तब तक विभाग 79230 वाहनों के चालान पुरानी दरों पर कर चुका था। 
इसके अनुसार विभाग ने इन वाहनों से कुल 3.17 करोड़ का जुर्माना कम वसूला। इस पर शासन ने पुलिस मुख्यालय को कड़ा पत्र लिखकर कहा कि अगर अब कम शुल्क वसूला गया तो संबंधित कार्मिक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कैग ने अपनी संस्तुति में कम राजस्व वसूलने के दोषी संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की बात कही है। दोषियों से 49.56 लाख नहीं वसूल पाया उद्योग विभाग कैग ने उद्योग विभाग द्वारा नियमों का उल्लंघन करने वाले एक उद्योग से 49.56 लाख की वसूली न करने पर भी टिप्पणी की है।
कैग ने कहा कि सरकार ने एक अप्रैल 2008 के बाद राज्य में उद्योग स्थापित करने वालों को सहायता प्रदान करनी शुरू की। इसमें यह प्रविधान था कि उद्योग 10 वर्ष तक जारी रहे। वहीं एक उद्योग मैसर्स ब्लू बेल को पूंजीगत सब्सिडी के रूप में 25 लाख रुपये और ब्याज सब्सिडी के रूप में 6.39 लाख रुपये दिए गए। इस कंपनी ने केवल तीन साल तक होटल चलाया। यह नियमों का उल्लंघन था और उसे पूंजी सब्सिडी में 18.17 लाख रुपये और ब्याज सब्सिडी पर 31.39 लाख रुपये देने थे। बावजूद इसके विभाग यह राशि वसूलने में नाकाम रहा।

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