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देहरादून, राज्य ब्यूरो। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के अचानक दिल्ली दौरे से एक बार फिर मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं। दरअसल, जून में मुख्यमंत्री स्वयं मंत्रिमंडल विस्तार की बात कह चुके हैं, हालांकि इसके बाद विभिन्न कारणों से बात आगे नहीं बढ़ पाई थी। 

उत्तराखंड विधानसभा में 70 विधायक हैं। इस लिहाज से यहां अधिकतम 12 सदस्यीय मंत्रिमंडल ही बन सकता है। मार्च 2017 में मुख्यमंत्री की शपथ लेने के बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने मंत्रिमंडल में नौ विधायकों को शामिल किया। तब दो पद शेष रह गए थे। तब से ही कई विधायक इन पदों के भरने की बाट जोह रहे हैं। 

दो माह पूर्व संसदीय कार्य एवं वित्त मंत्री प्रकाश पंत के आकस्मिक निधन के चलते मंत्रिमंडल में एक पद और रिक्त हो गया। इसके बाद मंत्रिमंडल विस्तार की उम्मीद और बलवती हो गई। जून में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने खुद मंत्रिमंडल विस्तार की बात कही। 

हालांकि, तब उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि मंत्रिमंडल में रिक्त चल रहे तीन पदों में से कितने भरे जाएंगे। इन पदों के लिए संभावित दावेदारों ने बाकायदा दिल्ली तक लॉबिंग शुरू कर दी थी लेकिन मंत्रिमंडल विस्तार मूर्त रूप नहीं ले पाया। 

दरअसल, देखा जाए तो मुख्यमंत्री के लिए नए मंत्रियों की नियुक्ति किसी चुनौती से कम नहीं है। मौजूदा सरकार में 20 से ज्यादा भाजपा विधायक ऐसे हैं, जो दो या इससे ज्यादा बार विधायक रह चुके हैं। इनमें पांच पूर्व मंत्री भी शामिल हैं। जाहिर है कि इतने दावेदारों के बीच में से मंत्रिमंडल के रिक्त पदों के लिए उपयुक्त विधायक को चुनना किसी चुनौती से कम नहीं है। 

यह पहले से ही तय है कि केंद्रीय नेतृत्व जिसके नाम पर मुहर लगाएगा वहीं मंत्रिमंडल में जगह पाएगा। बुधवार को जिस तरह मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत बिना किसी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अचानक दिल्ली रवाना हुए, उससे चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। 

हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय का कहना है कि मुख्यमंत्री ने कुछ मंत्रियों से मुलाकात के लिए पहले समय मांगा था। इनमें से कुछ ने समय दे दिया है, इस कारण वह उनसे मिलने दिल्ली गए हैं।

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