राज्य ब्यूरो, देहरादून: एनएच 74 (हरिद्वार-ऊधमसिंह नगर-बरेली) मुआवजा घोटाले के मामले में दो आइएएस अधिकारियों पर की गई निलंबन की कार्रवाई के बाद से नौकरशाही में बेचैनी है। सरकार के इस कदम के बाद नौकरशाह कुछ अचंभित भी नजर आए। वहीं, सूत्रों की मानें तो इस मामले में अब दोनों अधिकारी कैट की शरण ले सकते हैं। इसके पीछे कारण यह कि निलंबन के मामले में एक पूर्व आइएएस को कैट से राहत मिल चुकी है।

प्रदेश सरकार ने बीते रोज एनएच-74 मुआवजा घोटाला मामले में एसआइटी की रिपोर्ट के आधार पर प्रथम दृष्ट्या दोषी पाए गए आइएएस अधिकारी डॉ. पंकज कुमार पांडेय और चंद्रेश यादव को निलंबित कर दिया था। सरकार के इस सख्त कदम को लेकर नौकरशाही बेचैन है। दरअसल, सरकार द्वारा ऐसा कदम उठाए जाने की संभावना बेहद कम थी। कारण यह कि कई वरिष्ठ आइएएस और यहां तक कि आइएएस एसोसिएशन ने भी इस मामले में सरकार के सामने अपनी बात रखी थी। इतना ही नहीं, एसआइटी द्वारा अधिकारियों से पूछताछ पर भी काफी समय बीत गया था और एसआइटी द्वारा अंतिम रिपोर्ट भी नहीं मिली थी। ऐसे में सरकार का यह कदम नौकरशाही के लिए बेहद अप्रत्याशित रहा। एक और अहम बात यह थी कि मुख्यमंत्री सोमवार रात को इस आदेश पर हस्ताक्षर कर चुके थे। मंगलवार को दोपहर बाद जब अधिकारियों को निलंबन पत्र जारी कर दिए गए उसके बाद ही यह जानकारी बाहर आई। सरकार के इस कदम के बाद कुछ अन्य मामलों में जांच की जद में आए नौकरशाह अब खासे परेशान हैं।

वहीं निलंबन के बाद दोनों अधिकारियों ने शासन में ज्वाइनिंग देनी है लेकिन फिलहाल इनमें से किसी ने ज्वाइनिंग नहीं दी है। सूत्रों की मानें तो ये दोनो अधिकारी अब कोर्ट अथवा कैट की शरण ले सकते हैं। दरअसल, पूर्व में निलंबित किए गए आइएएस हरिश्चंद्र सेमवाल एक मामले में कैट गए थे और वहां से उनका निलंबन वापस लिया गया था।

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